मथुरा। माया टीले पर हुए हादसे से पहले पिछले हिस्से में बने एक बड़े मकान को सुनील चैन पहले ही ढहा चुका था। मकान ढहाने के बाद नीचे का टीला भी काट दिया था। खुदाई आगे बढ़ाने पर पीड़ित परिवारों ने उसका विरोध भी किया था, लेकिन अपने रसूख के आगे उसने किसी की नहीं सुनी।
शाहगंज दरवाजा स्थित जमीन को खरीदने के बाद सुनील चैन ने इसे बढ़ाने के लिए टीला काटना शुरू किया था। टीला काटने के दौरान पीछे की तरफ बने एक मकान के मालिक ने डर कर अपना मकान सुनील चैन को ही बेच दिया था। टीले पर रहने वालीं ललिता देवी बताती हैं कि यह मकान चौमुहां वाले विजेंद्र डॉक्टर का था। यह मकान काफी बड़ा था।
इसका निकास अन्य मकानों की तरफ न होकर पीछे की तरफ था। इस मकान को खरीदने के बाद सुनील चैन ने प्लॉट की तरफ से टीले को काटना शुरू किया। करीब 50 फुट टीला काटने के साथ ही खरीदा गया मकान भी चैन ने ढहा दिया था। इस मकान की ईंटों को भी दीवार बनाने के लिए उपयोग में ले लिया था।
इसके बाद ही पीड़ित परिवारों को अपना मकान ढहने का डर सताने लगा था। पाीड़ित मानसिंह बताते हैं कि आगे जब टीले की खुदाई बढ़ी तो सभी लोग एकत्रित होकर इसे रोकने गए थे लेकिन सुनील ने उनकी एक नहीं सुनी और खुदाई करता ही चला गया। नतीजा यह हुआ कि टीला ढह गया और उस पर बने छह मकान भी ढह गए। इस हादसे में दो बहनों समेत तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
दूसरी तरफ कई लोग खाली कर गए थे मकान
टीले पर करीब तीन माह से खुदाई कर दीवार बनाने का काम चल रहा था। इस दौरान टीले के दूसरी तरफ स्थित मकानों में रहने वाले कई परिवार वहां से मकान खाली कर चले गए थे। क्योंकि उन्हें डर था कि अगर टीला ढहा तो उन्हें जान माल का नुकसान हो सकता है। हालांकि इस तरफ टीले की खुदाई के बाद दीवार लगाने तक कोई हादसा नहीं हुआ।