पर्यावरण विभाग की भट्ठा संचालन के लिए की गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की बाध्यता ने ईंट भट्ठा व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे भट्ठा स्वामियों को नुकसान हो रहा है वहीं हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। एनओसी की बाध्यता के विरोध में देश भर के भट्ठा संचालकों ने हड़ताल दी है।
अब तक अक्तूबर माह में ही ईंटों की पथाई का कार्य शुरू हो जाता था। नवंबर माह में ईंटों की पकाई शुरू हो जाती थी। इस बार दिसंबर माह में भी पथाई कार्य शुरू नहीं हुआ है। भट्ठों पर ईंटों का पुराना स्टॉक भी समाप्ति की ओर है। जिला ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर प्रधान ने बताया कि जब तक पर्यारण विभाग एनओसी की बाध्यता समाप्त नहीं करता तब तक भट्ठा शुरू नहीं किए जाएंगे।
भट्ठा संचालक और रालोद नेता चौधरी भगवती प्रसाद ने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार की मनमानी के चलते देशभर में ईंट भट्ठा व्यवसाय प्रभावित है। इस नुकसान की भरपाई आने वाले पांच वर्षों में संभव नहीं है। नौहझील ब्लॉक क्षेत्र में लगभग दो सौ भट्ठे हैं। यहां रहने वाले हजारों मजदूरों के परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो रहा है। भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर प्रधान ने बताया कि एनओसी की बाध्यता समाप्त करने के लिए भट्ठा एसोसिएशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दी गयी याचिका पर सुनवाई जनवरी माह में होगी।