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उदारता व लोक-कल्याण की प्रतिमूर्ति थे श्रीपाद बाबा

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वृंदावन। मोतीझील स्थित श्रीराधा उपासना कुंज में चल रहे श्रीपाद बाबा महाराज के 25 वें समाराधन महोत्सव के दूसरे दिन अनेक संतों-विप्रों व श्रद्धालुओं ने मंगल समाज गायन किया। इसमें बाबा महाराज के जीवन दर्शन से संबंधित पदों का गायन हुआ। संत-विद्वत संगोष्ठी में चतु:संप्रदाय के श्रीमहंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि श्रीपाद बाबा महाराज सहजता, सरलता, उदारता व लोक कल्याण की प्रतिमूर्ति थे।
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रंगलक्ष्मी संस्कृति महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामकृपालु महाराज ने कहा कि श्रीपाद बाबा संत समाज के मसीहा थे। ब्रज साहित्य सेवा मंडल अध्यक्ष व समाराधन महोत्सव के समन्वयक डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि महाराज परम त्यागी व तपस्वी संत थे। श्रीराधा उपासना कुंज के महंत बाबा संत दास महाराज व ब्रज अकादमी की सचिव साध्वी डॉ. राकेश हरिप्रिया ने भी विचार रखे।
पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ, डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा, ब्रज अकादमी के निदेशक डॉ. बीबी माहेश्वरी, संत महेशानंद सरस्वती, बालशुक पुंडरीक महाराज, रमाकांत शास्त्री, युवा साहित्यकार राधाकांत शर्मा, घमंडदेव पीठाधीश्वर रूपकिशोर दास महाराज, श्याम रामायणी, हिताश्रम की सचिव हितप्रिया किंकरी, संत सेवानंद ब्रह्मचारी, रामनरेश ब्रह्मचारी, लक्ष्मण माहेश्वरी, मनोज मदान, अरुण माहेश्वरी व भजन गायिका आरती शर्मा मौजूद थीं। संवाद
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