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राधाबल्लभ सम्प्रदाय की बहुमूल्य निधि हैं श्रीहित स्वामिनी शरण महाराज

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वृंदावन। सेवाकुंज गली स्थित ठाकुर श्रीहित राधिका वल्लभलाल मंदिर में रस भारती संस्थान के संत श्रीहित स्वामिनी शरण महाराज की जयंती एवं खिचड़ी महोत्सव मनाया गया। महोत्सव में संतों, विद्वानों एवं भक्तों ने महाराजश्री के चित्रपट का पूजन-अर्चन कर उनका स्मरण किया।
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राधावल्लभीय समाज मुखिया डॉ. श्याम बिहारी खंडेलवाल व डॉ. जयेश खंडेलवाल की मुखियायी में मंगल बधाई समाज गायन हुआ। इसमें अनेक राधावल्लभीय संतों की वाणियों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन हुआ। रस भारती संस्थान के निदेशक डॉ. जयेश खंडेलवाल ने कहा कि संतप्रवर श्रीहित स्वामिनी शरण महाराज राधावल्लभीय रससिद्ध परंपरा के प्रमुख संवाहक थे। उनका जन्म मधुपुर (काशी) में हुआ है। बाद में वह श्रीधाम वृंदावन चले आए। यहां उन्होंने अखंड वास किया।
रस भारती संस्थान के समन्वयक व अध्यात्मविद डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीहित स्वामिनी शरण महाराज राधावल्लभीय संप्रदाय की बहुमूल्य निधि हैं। उनकी 30 हस्तलिखित पांडुलिपियां रस भारती संस्थान में सुरक्षित हैं। साथ ही उनकी अन्य पांडुलिपियों की खोज निरंतर जारी है। बहुत शीघ्र इन पांडुलिपियों का संस्थान प्रकाशन भी कराएगा।
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श्रीराधावल्लभ संप्रदाय के प्रमुख विद्वान आचार्य विष्णुमोहन नागार्च, डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा, कमल नयन महराज, हरिवंश खंडेलवाल, दानबिहारी खंडेलवाल, श्रीहितकमल दास महाराज, महंत श्याम सुंदर महाराज, गोवर्धन दास अग्रवाल, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, सुरेशचंद्र खंडेलवाल, गोवर्धन दास अग्रवाल, बाबा गोपालदास सुल्तानियां, शारदा देवधर, हितेश खंडेलवाल, कैलाश रावत, कृष्णा खंडेलवाल, छैलबिहारी खंडेलवाल, मूलचंद थे।
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