दोनों पक्ष कर रहे अपने-अपने दावे
ईदगाह के अमीन निरीक्षण संबंधी आदेश 20 जनवरी तक टलने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। वादी पक्ष का कहना है कि उनका दावा शत प्रतिशत सही है और वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ व ईदगाह पक्ष के बीच हुआ दावा गलत है। मुस्लिम पक्ष ने केस के वादी होने पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि वादीगण प्रश्नगत संपत्ति से कोई संबंध ही नहीं रखते हैं।
वादी विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता शैलेष दुबे ने बताया कि अदालत द्वारा ईदगाह की अमीन रिपोर्ट संबंधी आदेश किया गया है, वह विधिक न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया है। सिविल संबंधी सभी वाद में अदालत द्वारा अमीन से पहले मौके की रिपोर्ट मंगाई जाती है उसके बाद आगे प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
अदालत ने अभी अमीन निरीक्षण के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है, केवल प्रतिवादीगण को सुनने के लिए 20 जनवरी को तारीख तय की है। वादी विष्णु गुप्ता ने बताया कि ईदगाह श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर खड़ी है। उनके पास जमीन का मालिकाना हक तक नहीं है। यदि उनके पास मालिकाना हक के कागजात हैं तो वह सामने लाएं।
'वादीगणों का जमीन से कोई संबंध नहीं'
ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि अमीन रिपोर्ट का आदेश उनको बिना सुने किया गया था। जितने भी वादीगण हैं वह जिस जमीन का दावा करते हैं उनका सीधे उस जमीन से कोई संबंध नहीं है। न उनके पक्ष में मालिकाना हक है और न ही और कोई कागजात। अधिवक्ता नीरज शर्मा ने बताया कि उन्होंने अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया है।
उन्होंने अदालत से कहा है कि अमीन कमीशन जारी होने संबंधी जो आदेश किया गया है वह उसमें प्रतिवादी हैं और उन्हें सुने बिना ही अमीन कमीशन का आदेश जारी हुआ है। हमने अदालत से यह भी कहा है कि जारी आदेश में तीन दिन के अंदर पैरवी किए जाने के निर्देश थे परंतु वह पैरवी अभी तक नहीं की गई है। यदि कोई नया आदेश हो तो उन्हें भी सुना जाए। हमारे द्वारा केस से संबंधित सभी कागजात भी मांगे गए हैं।