गांव-गांव, गली-गली घूमकर यमुना मुक्ति, ब्रज की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने के लिए जुटे ब्रजयात्रियों के कदम डिग नहीं रहे हैं। यात्रियों का कारवां लगातार बढ़ रहा है। श्रीराधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा के शनिवार को गांगरौल पहुंचने पर हर ओर जोरदार स्वागत किया गया।
पग-पग पर ग्रामीणों के झुंड यात्रा की अगवानी के लिए पलकें बिछाए खड़े थे। पूरा माहौल राधे-राधे के स्वरों से गुंजायमान कर रहा है। संत रमेश बाबा के निर्देशन में मान मंदिर बरसाना की ब्रज यात्रा रास्ते में भीमागढ़ी, कासरोट, तपोवन, चीरघाट आदि पौराणिक स्थानों के दर्शन करती हुई गांगरौल पहुंची।
पड़ाव स्थल पर सत्संग के दौरान रमेश बाबा ने कहा कि यमुना में शुद्ध जल आए। प्रदेश में यमुना में पानी नहीं जहर है। देशभर के लाखों श्रद्धालु यमुना में आचमन की सोचते हैं तब उनका मन यमुना की बदतर हालत को देखकर द्रवित हो जाता है। हरियाणा के हथिनी कुंड और दिल्ली के वजीराबाद बांध से यमुना के रोके पानी को शीघ्र छोड़ा जाए। संकल्प को पूरा कराने के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगे।
बाबा ने चीरघाट, तपोवन के बारे में विस्तार से बताया। यात्रा में भागवताचार्य श्रीती शर्मा ने कहा कि ये सांवरी सलोनी सूरत वाला बहुत बड़ा ठग है। जो एक बार इसे देख लेता है, उसे चारों तरफ इसी की तलब लगी रहती है। मनुष्य को संसार में रहते हुए अपने चित्त में सदैव राधाकृष्ण का स्मरण रखना चाहिए।
इस दौरान भजन ये जीवन है श्यामा तेरे सहारे, चले जा रहे हैं किनारे-किनारे... पर यात्री झूम उठे। भागवताचार्य रामजीलाल शास्त्री ने कहा कि कई आंदोलन के बाद भी सरकार यमुना में स्वच्छ जल प्रवाहित करने की ओर कोई कदम नहीं उठाया।
राधाकांत शास्त्री ने कहा कि आज यमुना इस कदर विषैली हो चुकी है कि उसमें आचमन लेना भी दूर हो गया। यमुना देश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। इसका तकरीबन 40 फीसदी पानी श्रद्धालुओं और 60 फीसदी जल किसानों को मिलना चाहिए।
प्रभात फेरी निकल रही है या नहीं
यात्रा में साथ चल रहे राधाकांत शास्त्री ने सबसे पहले ग्रामीणों से पूछा कि गांव में प्रभात फेरी निकल रही है। ग्रामीणों ने हां में जवाब दिया। ग्रामीण बड़े ही उत्साह से पूजन ढोल-मजीरा और माइक केे साथ राधे-राधे की धुनों पर नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे थे।