कोसीकला। गोमती सरोवर स्थित श्री बालाजी मंदिर परिसर में आस्था, शंख ध्वनि और श्री बालाजी महाराज का जयघोष...। सैकड़ों पदयात्रियों का सैलाब...। यह नजारा पिछले 36 सालों से बालाजी पदयात्रा के दौरान हर वर्ष नजर आता है। आस्था का यह कारवां निरंतर बढ़ता ही जा रहा है।
मंदिर के श्रीमहंत कृष्ण मुरारी भारद्वाज ने शुरू किए इस आस्था के सागर में हर कोई गोते लगाकर अपने आपको धन्य मानता है। 7 फरवरी से शुरू होने वाली इस यात्रा में शामिल होने के लिए विभिन्न प्रदेशों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। अब तक 380 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
बालाजी मंदिर से हर वर्ष श्री मेहंदीपुर बालाजी को जाने वाली पदयात्रा का नजारा कुछ खास ही होता है। 6 पड़ावों के बाद मेहंदीपुर में श्री बालाजी महाराज के दर्शन के बाद यात्रा पूर्ण होती है। इसे यात्रियों की आस्था एवं विश्वास ही कहेंगे कि करीब 200 किलोमीटर पैदल यात्रा करने के बाद भी उनके चेहरे पर थकान महसूस नहीं होती है। पैदल यात्रा में नाचते गाते हुए आगे बढ़ते हैं। जहां हर गांव में उनका परंपरागत रूप से स्वागत होता है।
महंत कपीस भारद्वाज बताते हैं कि पदयात्रा में यूपी, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मुंबई, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित विभिन्न प्रदेशों के यात्री शामिल होते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों के प्रत्येक पड़ाव पर ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था की जाती है। संवाद
7 को नगर कीर्तन के साथ होगी रवाना
7 फरवरी को नगर कीर्तन के साथ रवाना होने के बाद यात्रा पहले दिन गांव सुनहेरा में रात्रि विश्राम करेगी। 8 फरवरी को पदयात्रा सीशवाडा में पहुंचेगी। 9 को सीशवाडा से चलकर नारहोली, जनूथर, बड़ी सौंख, बझेरा होते हुए रौनीजा में, 10 को खेडली में, 11 को महुआ में विश्राम करने के बाद 12 फरवरी को मेहंदीपुर बालाजी दर्शन के बाद 13 फरवरी को भंडारे के पश्चात वापस लौटेंगे।