वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी मंदिर की सेवा पूजा से जुड़े मुद्दे पर कमेटी और सेवायत आमने-सामने हैं। सुप्रीम कोर्ट में भले ही सुनवाई दो सप्ताह के टल गई हो लेकिन सेवायत परंपरा के साथ खिलवाड़ होने पर आवाज का मुखर करने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि ठाकुरजी की परंपरा को संभालने की जिम्मेदारी मंदिर के सेवायतों की है, कमेटी के बदलाव किसी भी सूरत में माने नहीं जाएंगे।
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत हिमांशु गोस्वामी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हर फैसले का सम्मान है। अदालत ने मंदिर के कई मुद्दों को सुनने के बाद दो सप्ताह बाद सुनवाई करने की बात कही है। सेवायतों का हाईपावर्ड कमेटी से कोई विवाद नहीं है लेकिन जब वह कमेटी ठाकुर जी परंपराओं में बदलाव करने की कोशिश करेगी तो सेवायत विरोध करेंगे। कोर्ट में मंदिर के समय में बदलाव, वीआईपी को बढ़ावा, देहरी पूजन, गुरु-शिष्य की परंपरा बंद कराने के कमेटी के आदेशों का विरोध किया था।
कमेटी के इन फैसलों को हुआ था विरोध
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित हुई श्री बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन हाईपावर्ड कमेटी ने मंदिर की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए परंपरा में हस्तक्षेप करना शुरु कर दिया। मंदिर के दर्शन समय बढ़ाने से ठाकुरजी के विश्राम के समय में कमी आ रही थी, इस कारण से सेवायतों ने विरोध किया। फिर ठाकुरजी को जगमोहन में विराजमान कराने के लिए कमेटी की ओर से कहा गया। मंदिर के सेवायतों ने इससे इन्कार कर दिया। सेवायतों का कहना था कि जगमोहन में ठाकुरजी सेवा परंपरा के अनुसार ही आएंगे। कमेटी के शामिल सेवायत ने पंरपरा को तोड़ते हुए जगमोहन में ठाकुर जी को खंडित सिंहासन पर विराजमान करा दिया। देहरी पूजन को बंद करने से भी सवाल खड़े हुए। हालांकि अभी हाल में हुई मीटिंंग में कमेटी ने सर्वसम्मति से सिंहासन पूजा को अनुमति दे दी है।