फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीबांकेबिहारी मंदिर: सेवायतों की दो टूक...बोले-ट्रस्ट स्वीकार नहीं, हम ठाकुरजी को मंदिर से लेकर चले जाएंगे

Sun, 01 Jun 2025 09:02 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रस्तावित ट्रस्ट का विरोध सेवायतों की ओर से जारी है। अधिकारी फिर सेवायतों से बात करने पहुंचे, लेकिन सेवायतों ने ट्रस्क की बात को सिरे से नकार दिया।
विज्ञापन
बैठक करते अधिकारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मथुरा के वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रस्तावित ट्रस्ट का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को भी प्रशासन की ओर से मंदिर सेवायतों को समझाने की एक और कोशिश की गई लेकिन बात नहीं बनी। सेवायतों ने कहा कि किसी भी कीमत पर ट्रस्ट स्वीकार नहीं है। अगर यही स्थिति रही तो हम ठाकुरजी को लेकर इस मंदिर से चले जाएंगे। सरकार को मंदिर, दुकान और मकान सब सौंप देंगे।
विज्ञापन


जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह मंदिर पहुंचे और सेवायतों के साथ बैठक की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित ट्रस्ट बनने के बाद भी सेवायतों की परंपरागत सेवा-पद्धति और अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। डीएम ने कहा कि मंदिर की पुरानी परंपराएं यथावत रहेंगी। ट्रस्ट का मकसद व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाना है न कि किसी के अधिकार छीनना।

सेवायतों का कहना है कि ट्रस्ट की नियमावली में ऐसा कुछ नहीं लिखा है जिससे उनकी भूमिका स्पष्ट हो। उल्टा, शासन को सारे अधिकार मिलने की बात कही गई है। बैठक में उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह ने ट्रस्ट की डीड पढ़कर सुनाई और कहा कि सेवा-पद्धति पहले की तरह ही जारी रहेगी। 
विज्ञापन


एसएसपी ने कहा कि सभी का उद्देश्य एक ही है सबका भला हो, किसी का नुकसान न हो लेकिन सेवायतों ने अधिकारियों की बातों को सिरे से नकार दिया। सेवायत रजत गोस्वामी ने कहा कि सरकार ट्रस्ट के जरिए मंदिर पर सीधा नियंत्रण चाहती है लेकिन यह वह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

 
विज्ञापन

सेवायत बोले- मंदिर हमारा, व्यवस्था पर क्यों होगा बाहरी लोगों का कब्जा
सेवायतों ने कहा कि यह मंदिर उनकी परंपरागत आस्था और सदियों पुरानी सेवा से जुड़ा है। मंदिर की व्यवस्था में बाहरी लोगों की नियुक्ति वे नहीं स्वीकार करेंगे। विलास गोस्वामी ने कहा कि हमसे कहा जा रहा है कि व्यवस्था सुधरेगी। पर हमारी व्यवस्था में कमी क्या है। अगर कोई सुझाव देना है तो दीजिए लेकिन मंदिर की कमान हमारे हाथ से छीनना मंजूर नहीं। ट्रस्ट की नियमावली को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि प्रस्तावित ट्रस्ट में प्रशासनिक अधिकारियों की संख्या ज्यादा होगी और सेवायत अल्पमत में रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ शासन के पास होगा।

मथुरा के जिलाधिकारी  सीपी सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कॉरिडोर और न्यास की वजह से किसी को भी परेशानी नहीं होगी। शासन और प्रशासन इस बात के लिए भरोसा दिलाता है कि जिसका भी नुकसान होगा उसे उचित मुआवजा दिया जाएगा। जिसकी दुकान जाएगी उसे दुकान भी दी जाएगी। सभी को यह बात समझनी चाहिए कि सरकार किसी का अहित नहीं करेगी। बल्कि व्यवस्था में सुधार को कार्य किया जा रहा है।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें