वृंदावन शोध संस्थान और व्यंजना साहित्य समिति इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक संदर्भ में राधाकृष्ण का प्रेम विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन रविवार से शुरू हो गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि राधाकृष्ण का प्रेम सार्वभौमिक है।
संस्थान सभागार में पद्मश्री डा. सोनल मानसिंह ने कहा कि राधा और कृष्ण का प्रेम लौकिक, अलौकिक और आध्यात्मिक सभी रूप में विद्यमान है। उन्होंने कहा कि प्रेममयी दृष्टि तभी परिपूर्ण होती है, जब एक आंख में राधा और दूसरी आंख में श्रीकृष्ण विराजमान हों।
संस्थान निदेशक डा. महेश नारायण शर्मा ने कहा कि प्रेम जीवन का अभिन्न अंग है। इसके बिना रस का अनुभव नहीं किया जा सकता। संयोजिका मधुरानी शुक्ला ने कहा कि राधाकृष्ण के प्रेम में विविध रूपों का चिंतन और मनन है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डा. बिंदु विद्या सिंह ने कहा कि राधा और कृष्ण का प्रेम सार्वभौमिक और लोक संस्कृति के रोम-रोम में बसा हुआ है। इस अवसर पर डा. संजीव श्रीवास्तव, डा. अनूप शर्मा, डा. नंदकिशोर शर्मा, डा. मनीष कुमार मिश्रा आदि उपस्थित रहे।