छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के संबंध में जिले के 78 कालेजों पर शक की सूई घूम रही है। शासन को आशंका है कि कहीं इन कालेजों ने कोई हेराफेरी तो नहीं की है। जिला प्रशासन ने 12 अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
मामला शैक्षिक सत्र 2015-16 के दौरान छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति पाने वाले कालेजों का है। जांच के दायरे में दो प्रकार के कालेज रखे गए हैं। पहले प्रकार में वो कालेज हैं, जो कुल छात्र संख्या के 30 प्रतिशत तक एससी/एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं को दर्शा रहे हैं और इनकी छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति प्राप्त कर रहे हैं। जनपद में ऐसे कालेजों की संख्या 42 बताई जा रही है।
दूसरे प्रकार में वो कालेज हैं जिनको छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के एवज में एक करोड़ से अधिक की राशि दी गई है। जनपद में ऐसे कालेजों की संख्या 36 बताई जा रही है। जांच के लिए लगाए गए 12 अफसरों में सभी एसडीएम और डिप्टी कलक्टर स्तर के हैं।
शासन के आदेश पर 30 प्रतिशत या फिर इससे अधिक अनुसूचित जाति के छात्रों वाले कालेज और 1 करोड़ से अधिक धनराशि स्कालरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में पाने वाले कालेजों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
-डा. उमाशंकर शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी