दो चरण में चलेगा काम
सौभरि वन का काम दो चरण में बांटा गया है। प्रथम चरण में लगभग 123 हेक्टेयर में 76,875 पौधे वन विभाग द्वारा लगाए गए हैं। इनमें पाखर, पीपल, जामुन, शीशम, आंवला, नीम, अर्जुन, बरगद, आम, जामुन आदि के पौधे हैं। दूसरे चरण में 42 हैक्टेयर में पौधे लगाने का काम शीघ्र शुरू करने की योजना है।
पर्यटकों को मिलेगा सुकून
शहर वन विकसित करने के पीछे प्रशासन की मंशा मथुरा-वृंदावन आने वाले पर्यटकों के लिए एक घमूने का बेहतर स्थान उपलब्ध करवाना है। ब्रज में घूमने के बाद शहर में आकर उन्हें सुकून मिलेगा। यह अलग बात है कि वन को पूरी तरह विकसित होने में अभी कई साल लगेंगे। लगाए गए पौधे जीवित रहे इसके लिए भी बखूबी प्रयास करने होंगे।
कई विभाग मिलकर कर रहे काम
सौभरि वन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण और वन विभाग द्वारा सामूहिक रूप से किया जा रहा। परियोजना का पर्यावरणीय, पौराणिक और धार्मिक महत्व भी है। इस परियोजना से पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत बनेगा और स्थानीय पर्यावरण स्थल का विकास होगा।
सौभरि ऋषि की है तपोस्थली
चयनित परियोजना स्थल के एक ओर कोसी ड्रेन और दूसरी ओर यमुना नदी है। बीच का यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की कालीयदह दमन लीला और सौभरि ऋषि की तपोस्थली है। इस कारण चयनित क्षेत्र पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से काफी अहम है। सुनरख में आज भी सौभरि ऋषि का आश्रम है। विष्णु पुराण, देवी भागवत पुराण एवं श्रीमद्भागवत पुराण के नवस्कन्द के छठे अध्याय में सौभरि ऋषि के विषय में भी वर्णन है।
डिप्टी रेंजर ब्रजेश सिंह परमार ने बताया कि सुनरख, आटस और गांव जहांगीरपुर को मिलाकर 176 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। यहां 76 हजार से अधिक पौधे रोपकर शहर वन विकसित किया जा रहा है। वन बनने से इलाके में वातावरण शुद्ध होगा। इसमें लाइटिंग की भी व्यवस्था कर पार्क का रूप दिया जा रहा है। दोंनों चरणों पूरे होने के बाद यह प्रदेश का सबसे बड़ा शहर वन होगा।