वृंदावन (मथुरा)। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा रविवार को ‘सांझी’ कार्यशाला का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें सांझी विशेषज्ञों द्वारा सांझी के स्टेंसिल (खाकों) पर चर्चा की। सांझी कलाकार विश्वजीत दास ने बताया कि सांझी में खाकों का विशेष महत्व है। सांझी बनाते समय खाकों को सही ढंग से रखना तथा उन्हें सावधानी से उठाना ही एक कुशल सांझी कलाकार की विशेषता है।
उन्होंने ऑनलाइन भाग ले रहे प्रतिभागियों को सांझी स्टेंसिल काटना भी सिखाया। चित्रकार ब्रजगोपाल गुप्ता ने कहा कि खाकों को काटते समय बंधों का भी ख्याल रखना चाहिए। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि ‘सांझी’ ब्रज की अनुपम कला है। संस्थान द्वारा इसे संरक्षित करने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। ऑनलाइन कार्यशाला में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस अवसर पर कनिका शर्मा, अभिलाषा चौधरी, परिधि डेविड मैसी, स्नेहा नगरकर, वर्षा तिवारी आचार्य, गोपाल शरण शर्मा, शाश्वत तिवारी आदि उपस्थित थे। संचालन सुरभि पांडेय व हितांगी ब्रह्मभट्ट व धन्यवाद ज्ञापन अमनदीप वशिष्ठ ने दिया।