वृंदावन। सुदामा कुटी के महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी आश्रम के संस्थापक संत सुदामा दास वर्ष 1926 में वृंदावन आए थे, तभी से वह यहां गो, संत, विप्र एवं दरिद्र नारायण की सेवा परंपरा शुरू की। वह जीवन भर सेवा कार्यों में जुटे रहे और सुदामा कुटी आश्रम की स्थापना की। तभी से सुदामा कुटी पीड़ित मानवता की सेवा को समर्पित है।
यह विचार उन्होंने परिक्रमा मार्ग स्थित सुदामा कुटी आश्रम के संस्थापक संत सुदामा दास महाराज के वृंदावन आगमन के शताब्दी महोत्सव एवं जगतगुरु रामानंदाचार्य महाराज की जयंती महोत्सव में आयोजित संत सम्मेलन में व्यक्त किए। कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य आयोजित महोत्सव में देशभर से भक्तजन पहुंच रहे हैं। स्वामी राम दिनेशाचार्य ने कहा कि संत सुदामा दास महाराज ब्रज की विभूति थे। दशरथ महल अयोध्या के महंत बिंदु गद्याचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य ने कहा कि संत सुदामा दास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। महंत मोहनदास, महंत हरिदास महाराज, गुरु प्रसन्न दास महाराज, महंत मनमोहन दास, महंत पुरुषोत्तम दास एवं महंत जयरामदास आदि ने विचार रखे। कथा प्रवक्ता हित अंब्रेश महाराज द्वारा भक्तों को कथा का रसपान कराया जा रहा है रासलीला का मंचन भी किया जा रहा है। इस अवसर पर महंत केशव महाराज, महंत बालकृष्ण दास, स्वामी अखिलेश्वर दास, महंत सनत कुमार शरण, महंत राजेंद्र दास निर्मोही, महंत सुदर्शन दास, महंत दिलीप दास आदि मौजूद रहे।