मथुरा। परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही अब रोडवेज के राजस्व पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि पिछले एक महीने से रोडवेज बसों को यात्रियों का टोटा झेलना पड़ रहा है। कई रूटों पर बसें खाली या आधी सीटों के साथ दौड़ रही हैं। बस चालक और परिचालक मजबूरी में बिना सवारी के लंबा सफर तय करने को विवश हैं।
निगम द्वारा समय पर बसों के रखरखाव, रूटों के पुनर्गठन और यात्रियों की सुविधा के अनुसार सेवाएं नहीं दी जा रही हैं। इसका सीधा असर बसों की भराव क्षमता पर पड़ रहा है। जहां पहले एक बस में 50–55 यात्री मिल जाते थे, वहीं अब कभी 20-25 सवारियों पर बसें चल रही हैं। हालात यह हैं कि 22 हजार यात्रियों को प्रतिदिन सवारियां कराने वाला निगम अब 15-16 हजार तक ही सीमित रह गया है।
इधर, अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए चालक को अतिरिक्त समय मांगना पड़ता है। कुछ यात्रियों के अनुसार निजी ट्रेवल्स और ऑनलाइन टैक्सी सेवाओं की बेहतर सुविधा और समयबद्धता के कारण लोग रोडवेज से दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा बसों का निर्धारित समय पर न चलना सवारियों के इंतजार में बसों को खड़े रखना यात्रियों के विश्वास पर असर डाल रहा है। रोडवेज अधिकारियों के रिकॉर्ड में भी यह गिरावट साफ झलक रही है।
पिछले महीने की तुलना में राजस्व में करीब 20 से 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह स्थिति विभाग को खुद उसके ही रिकॉर्ड में पीछे धकेल रही है। इसके अलावा कुछ असर नवरात्र और पितृपक्ष ने भी डाला है।
वर्जन
इस महीने करीब 25 प्रतिशत सवारियों की कमी देखी गई है। मगर आगामी महीना त्योहारों का है। इससे घाटा पूरा कर लिया जाएगा।
-मदन मोहन शर्मा, एआरएम