ठाकुर राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में बुधवार शाम ठाकुरजी ने गिरिराज तलहटी की झांकियों के बीच श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
इस दौरान संपूर्ण प्रांगण गिरिराज महाराज के जयकारों से गुंजायमान रहा। गिरिराजजी की तलहटी में ब्रजवासी गोप-ग्वालों ने भी खड़े होकर गोवर्धन महाराज को छप्पन भोग निवेदित किए।
कुशल कारीगरों ने मंदिर में विशेष रूप से गिरिराज पर्वत की झांकी बनाई थी। जगद्गुरु पुरुषोत्तम गोस्वामी जी महाराज के सानिध्य में चल रहे महोत्सव में प्रतिदिन ठाकुरजी की नित नई झांकियों का भक्तों को दर्शन मिल रहा है।
मंदिर में वेदपाठी ब्राह्मणों ने हरिनाम संकीर्तन और भागवत का पाठ किया। डा. अच्युतलाल और आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने भक्तों को भागवत का रसपान कराया।
राग सेवा में तरुण दास ने श्रीगोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यौ..., मैं तो गोवर्धन कूं जाऊं नाय माने मेरौ मनवा... , तुम बिन मोरी कौन खबर ले गोवर्धन गिरधारी रे...आदि भजन प्रस्तुत किए।
सेवायत अभिनव गोस्वामी और सुवर्ण गोस्वामी ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। इसके बाद ठाकुर राधारमण लाल की आरती उतारी गई।
आयोजन में आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमन के 500वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में यह झांकी सजाई गई है। इसमें चैतन्य महाप्रभु भावरूप में ठाकुर राधारमण को हृदय में धारण कर गिरिराज पर्वत पर पधारे हैं। गोवर्धन महाराज भगवान श्रीकृष्ण के आराध्य हैं और इस पूजन के माध्यम से श्रीकृष्ण ने पर्यावरण की न केवल रक्षा की, बल्कि उसका महत्व और सम्मान करना भी सिखाया। ब्रज की पहचान यमुना, वृंदावन के अलावा श्रीगोवर्धन पर्वत भी है।