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संसद में धर्माचार्यों को मिलना चाहिए 10 प्रतिशत आरक्षण: देवकीनंदन महाराज

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वृंदावन। संसद में संत-धर्माचार्यों को 10 प्रतिशत आरक्षण के साथ उचित स्थान मिलना चाहिए। जिससे भारत की संस्कृति अनुरूप नियम-कानून बनाकर देश में सनातनी विचारों का सम्मान बचाया जा सके। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को प्रयास करने चाहिए।
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देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने श्रीमद्भागवत प्रवचन के वक्त यह मांग उठाते हुए सनातन धर्म के अनुयायियों से इस मुहिम को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। छटीकरा मार्ग स्थित ठा. श्री प्रियाकांतजू मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में बोलते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि भारत सनातनियों का देश है। सनातन धर्म विश्व में मंगल की कामना करता है, लेकिन सनातनी अपने ही यहां कई मोर्चों पर दूसरी विचारधाराओं से घिरे हैं।

शनिवार को भक्तों के बीच विचार रखते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि संसद में हर समाज से प्रतिनिधि आरक्षित हैं। इसी तरह साधु-संत-धर्माचार्य समाज के भी 50-55 प्रतिनिधि होने चाहिए। जिससे हम आगे की पीढ़ी के लिए भारत की सनातन संस्कृति और संस्कारों को सुरक्षित रख सकें। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है। इससे पूर्व मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में लिव-इन-रिलेशन, नया एडल्ट्री कानून लागू हो गया, समलैंगिक विवाह के लिए कानून की पैरवी करने वाले मौजूद हैं। जबकि गो हत्या, धर्म-परिवर्तन, ईशनिंदा जैसे विषयों पर राष्ट्रीय कानून बनाने की आवश्यकता है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने वाले कम हैं। इसके लिए संसद में सही-गलत बताने वाले धर्माचार्य होने चाहिए जो कानूनों को सनातन की कसौटी पर कस सकें।
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गौरतलब है कि संसद में धर्माचार्यों के आरक्षण के समर्थन में पूर्व कांग्रेसी प्रमोद कृष्णम एवं अन्य धर्माचार्य भी आगे आए हैं।
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