रंगजी मंदिर में श्रीब्रह्म उत्सव के दौरान गरुड़ की सवारी पर विराजमान भगवान रंगनाथ।
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वृंदावन(मथुरा)। दिव्य देश रंगनाथ मंदिर के चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन पक्षीराज गरुड़ की सवारी निकली। प्रात: काल बेला में ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ को स्वर्ण निर्मित गरुड़ जी पर विराजमान कर बारहद्वारी मंडप के समक्ष लाया गया। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन अर्चन किया गया ।
विद्वानों के मुताबिक स्वर्ण निर्मित गरुड़ जी पर वेदवेद्य भगवान विराजते हैं। इसी वाहन पर विराजमान होकर प्रभु गजराज को ग्राह (मगर) के फंदे से मुक्त किया था। अत: इनके दर्शन से क्रूर ग्रहों की शांति होती है। दु:स्वप्न दूर हो जाते हैं। वेद परायण का फल प्राप्त होता है और पक्षी योनि से मुक्ति मिल जाती है।
प्रात: काल निकली इस सवारी पर भगवान रंगनाथ की छवि अलौकिक और मनोहारी थी। सायंकाल वेला में भगवान रंगनाथ दासों में प्रमुख हनुमान जी पर विराजमान हुए। इस लीला में हनुमान जी ने अपने कंधों पर बैठाकर श्री राम लक्ष्मण की मित्रता सुग्रीव जी से कराई।
अत: स्वर्ण निर्मित श्री हनुमान जी पर विराजमान प्रभु के दर्शन करने से संकट दूर हो जाते हैं और सर्वत्र विजय, वैभव की प्राप्ति होती हैं। इस सवारी के बगीचा में पहुंचने पर आतिशबाजी की गई।