जवाहर बाग में कार्रवाई के दौरान रामवृक्ष को पुलिस ने आखिरी बार फोन पर बात करते हुए देखा था। वह किससे और क्या बातें कर रहा था यह कोई नहीं जान सका। कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों के अनुसार जब वे उसे पकड़ पाते वह लापता हो गया।
बता दें कि दो जून की शाम को करीब साढ़े पांच बजे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी फोर्स के साथ जवाहर बाग की बाउंड्रीवाल तोड़ने पहुंचे थे। जेसीबी ने दीवार तोड़ी ही थी कि पुलिस पर हमला हो गया। इस हमले में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष कुमार बुरी तरह से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल ले जा गया जहां उनकी मौत हो गई। हमले के बाद पुलिस जवाहरबाग में दाखिल हुई और कब्जाधारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
इस आपरेशन में शामिल पुलिसकर्मियों के अनुसार काफी फासले पर एक बुजुर्ग जो बिल्कुल रामवृक्ष की कदकाठी का था, एक पेड़ की आड़ में मोबाइल पर बात कर रहा था। फासला काफी था लिहाजा कुछ सुन पाना संभव नहीं हुआ लेकिन उसके हावभाव से घबराहट झलक रही थी। जब तक पुलिस वाले उस स्थान तक पहुंचे वह गायब हो गया और वहां बनी झोपड़ियां जल रही थीं।
टीम में शामिल पुलिसकर्मियों का मानना है कि वह रामवृक्ष ही था क्योंकि जहां से जले हुए शव बरामद हुए हैं वहीं आसपास वह फोन पर बात कर रहा था। सूत्रों के अनुसार रामवृक्ष को उम्मीद नहीं थी कि पुलिस कार्रवाई भी कर सकती है।