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जवाहर बाग को हरा भरा बनाने में जुटे कर्मचारी

Fri, 10 Jun 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
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ढाई साल तक कब्जे में रहा जवाहर बाग लगभग उजड़ चुका है। कभी हरियाली के बीच यह जगह खुशहाल नजर आती थी, आज बदहाली के सिवा कुछ नहीं है। ऐसे में उद्यानकर्मी उसे फिर से हराभरा बनाने में जुटे हैं। 
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बता दें कि तीन हजार से अधिक लोगों ने जवाहर बाग की 280 एकड़ जमीन पर कब्जे के दौरान यहां लगे 100 से अधिक हरे वृक्षों को नुकसान पहुंचाया है। वृक्षों के आसपास तंबू तानकर बनाई गई कालोनी के चलते वहां की हरी घास भी नष्ट हो गई। 25 बीघा से अधिक की हरियाली तो पहले ही नष्ट हो चुकी थी, दो जून को कार्रवाई के दौरान रामवृक्ष और उसके गुर्गों द्वारा लगाई आग से 100 से अधिक हरे पेड़ भी झुलस गए।

अब जिला उद्यान अधिकारी के निर्देश पर उजड़ी हुई जमीन की जुताई कराई गई है। जवाहर बाग में लगी चार सबमर्सिबल पंच की बोरिंग सही करा पाइप के जरिए जल चुके वृक्षों की जड़ों में पानी दिया जा रहा है। 
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बच्चों की तरह की वृक्षों की परवरिश 
उद्यान विभाग के कर्मचारी जवाहर बाग में पेड़ों की हालत देखकर दुखी हैं। आग से जले पेड़ों को पानी लगा रहे कर्मचारी भगवान सिंह और हरिओम ने बताया कि उन्होंने बच्चों की तरह वृक्षों की परवरिश की थी। ज्यादातर को कब्जाधारियों ने उजाड़ दिया है। जले हुए वृक्षों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब तो इनको भगवान ही जीवन देगा। 

ऐसा तो नहीं था अपना जवाहर बाग 
जवाहर बाग खाली होने के बाद अब लोग इसे देखने को उत्सुक हैं। रोजाना हजारों लोग बाग में पहुंच रहे हैं। शुक्रवार शाम बाग में पहुंचे चंदनवन निवासी रामवीर सिंह, विरमा देवी और उदयवीर सिंह ने बताया कि वे ढाई साल पहले तक जवाहर बाग में घूमने आते थे।

कचहरी आदि के काम से निवृत्त होने पर यहां हरियाली के बीच बैठकर आनंद की अनुभूति होती थी लेकिन अब जवाहर बाग का ज्यादातर हिस्सा उजड़ा हुआ है। उदयवीर सिंह बताते हैं कि तीन माह पहले जवाहर बाग में रामवृक्ष के लोगों ने बाजार लगाया था तो वे भी खरीददारी करने आए थे। इसमें 25 रुपये किलो चीनी, 40 रुपये किलो काले अंगूर, 12 रुपये किलो केला और 30 रुपये किलो अनार बेचे गए। 
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