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Mathura News: मूल नक्षत्र में जन्मेंगी राधारानी

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बरसाना/नंदगांव(मथुरा)। द्वापर युग में ब्रज की महारानी राधारानी का जन्म भले ही ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ हो पर इस बार वो मूल नक्षत्र में जन्म लेंगी। ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र दोनों ही गंडमूल नक्षत्र के भाग हैं।
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द्वापर युग में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को ज्येष्ठा नक्षत्र में अरुणोदय वेला में राधारानी का जन्म हुआ था। गंडमूल नक्षत्रों में एक नक्षत्र में जन्म लेने के कारण उनका एक नाम मूलो भी पड़ा। इस बार भी संयोगवश 23 सितंबर को गंडमूल नक्षत्र की श्रेणी के मूल नक्षत्र में उनका जन्म होगा। इसी कारण जन्म के बाद सेवायत अभिषेक से पहले मूल शांति के लिए पहले पूजन करेंगे। हालांकि यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है।

श्रीजी मंदिर के सेवायत प्रवीण गोस्वामी ने बताया कि जन्म अभिषेक से पूर्व 23 सितंबर को रात दो बजे गर्भ गृह में गुरु गद्दी से विराजे घनश्यामराज भट्ट, कृष्णानंद भट्ट सेवायतों के साथ विधि विधान पूर्वक 27 कुओं के जल, 27 वृक्षों की पत्तियों, 27 स्थानों की मिट्टी आदि से प्रतिवर्ष की भांति मूल शांति के उपाय किए जाएंगे।
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इसके बाद पांच सौ लीटर दूध-दही, 50 लीटर गंगाजल-गुलाब जल, 50 किलो शहद, 30 किलो घी, 100 किलोग्राम बूरे से अभिषेक किया जाएगा। इसमें इत्र, केसर आदि का भी प्रयोग किया जाएगा। सेवायतों की गुरु गद्दी के कृष्णानंद भट्ट महाराज ने बताया कि राधारानी जी का जन्म गंडमूल वाले ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ था। इस कारण उनका एक नाम मूलो भी था। अभिषेक से पूर्व आज भी मूल शांति की पूजा विधिविधान पूर्वक गर्भ गृह में की जाती है।
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