भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में श्रीराधारानी के प्रति अटूट आस्था लिए सैकड़ों श्रद्धालु राधे-राधे की रट लगाते हुए पथरीले रास्तों पर भी मुस्कराते चल रहे हैं। भजन संकीर्तन की धुन पर ब्रजबालाओं के कोमल पैर थिरक उठते हैं।
ब्रज के चौरासी कोस की यात्रा पर निकले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की टोली शुक्रवार को मथुरा (मधुपुरी) पहुंची।
यहां मात्र एक दिन विश्राम से ही पंचम पुरुषार्थ कृष्ण प्रेम का हृदय में प्रस्फुटन होने लगता है। इसे मधु के निवास के कारण मधुपुरी भी कहते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा मधु को मारने के बाद देवगणों ने यहां चौरासी तीर्थों को स्थापित किया।
मथुरा में चौदह करोड़ वन और चौदह करोड़ तीर्थ भी जाने जाते हैं, स्वयं भगवान शिव भूतेश्वर के रूप में यहां की रक्षा करते हैं। यमुना महारानी से सुशोभित इस पुरी में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर केशवदेव जी, भूतेश्वर, पोतराकुंड, विश्राम घाट, गताश्रम तीर्थ आदि स्थलों के यात्रियों ने दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।
यहां से यात्री बालक ध्रुव की तपस्थली रही मधुवन के दर्शन कर, मधुसूदन कुंड में आचमन स्नान के बाद मासूम नगर पहुंचे। यहां ब्रजवासियों ने यात्रियों का पुष्पमाला आदि से भव्य स्वागत किया और जलपान कराया।
धेनुकासुर वधस्थली तालवन अपने विश्राम स्थल पर यात्रा पहुंची। दिनभर के गोचरण के बाद भूख से पीड़ित ग्वालवालों ने यहीं ताड़ के फल खाए थे। रात्रि सत्संग के समय ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा महाराज ने समस्त स्थलों के माहात्म्य का वर्णन किया।
यमुना की दशा देख व्यथित हुए ब्रजयात्री
मथुरा। श्रीराधारानी ब्रजयात्रा में चल रहीं बाल साध्वी भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने यमुनाजी की स्थिति को देखकर अत्यंत दुख प्रकट किया।
यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है जो हम सभी ब्रजवासियों की प्राणाधार यमुना महारानी के लिए एकजुट होकर आगे नहीं आते। यदि यही स्थिति रही तो हम सदा के लिए यमुना महारानी से वंचित रह जाएंगे।