वृंदावन (मथुरा)। श्रीहितपरमानंद शोध संस्थान के तत्वावधान में ठाकुर प्रियावल्लभ कुंज में ठाकुर प्रियावल्लभ लाल एवं ठाकुर विजयराधावल्लभ लाल महाराज का पाटोत्सव सोमवार को प्रारंभ हो गया। शुभारंभ श्रीहित रासमंडल के श्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज, महंत सुंदर दास महाराज, महामंडलेश्वर सच्चिदानंद शास्त्री एवं भागवताचार्य रामप्रकाश भारद्वाज मधुर ने ध्वजारोहण कर किया। तत्पश्चात हितवाणी, हित चतुरासी एवं राधा सुधानिधि आदि ग्रंथों का संगीतमय गायन हुआ।
परमहितधर्मी रामप्रकाश भारद्वाज मधुर ने श्रीहितपरमानंद दास महाराज की वाणियों का गायन किया। संत-विद्वत सम्मेलन में पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ ने कहा कि श्री प्रियावल्लभ कुंज 18वीं शताब्दी के रससिद्ध संत एवं प्रमुख वाणीकार श्रीहितपरमानंद दास महाराज की साधना स्थली है। श्रीहितपरमानंद शोध संस्थान के समन्वयक व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीप्रियावल्लभ कुंज में दतिया की महारानी बखत कुंवरि (प्रिया सखी) के सेव्य ठाकुर प्रियावल्लभ लाल एवं श्रीहितपरमानंद दास जी महाराज के सेव्य ठाकुर विजयराधावल्लभ लाल विराजित हैं।
डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा व जगदीश शर्मा गुरु ने कहा कि राधवल्लभ संप्रदाय का वाणी साहित्य अत्यंत समृद्ध व उन्नत है। शिक्षाविद डॉ. सुनीता अस्थाना व ब्रजबिहारी शर्मा (बिरजू महाराज) ने कहा कि श्रीहितपरमानंद शोध संस्थान ने श्रीहितपरमानंद दास महाराज की वाणियों की पांडुलिपियों को खोज कर और उनका प्रकाशन कर सराहनीय कार्य किया है। श्रीहितपरमानंद शोध संस्थान के महामंत्री श्रीहितललित वल्लभ नागार्च व महंत मधुमंगल शरण शुक्ल ने कहा कि ठाकुर प्रियावल्लभ कुंज के पाटोत्सव का इतिहास 207 वर्ष पुराना है।
युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा ने ठाकुर विजयराधावल्लभ व ठाकुर प्रियावल्लभ लाल के विषय में ब्रजभाषा के कवियों का गायन कर सभी को भावविभोर कर दिया। त्रैमासिक पत्रिका हितोत्सव के नवीन अंक का विमोचन हुआ। आचार्य विष्णुमोहन नागार्च, कमला नागार्च, पार्षद रसिक वल्लभ नागार्च, रासबिहारी मिश्रा, युगलकिशोर शर्मा, तरुण मिश्रा, भरत शर्मा, हितबल्लभ नागार्च, डॉ. श्यामबिहारी खंडेलवाल, डॉ. जयेश खंडेलवाल, पंडित राकेश दुबे, रोहित दुबे थे।