वृंदावन। उड़िया बाबा आश्रम में शुक्रवार को 77वें निर्वाण उत्सव में प्रतिभाग करने का राष्ट्रपति का कार्यक्रम निरस्त हो गया। उनके दौरे के लिए आश्रम में पिछले 15 दिनों से बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही थीं। ऐन वक्त पर राष्ट्रपति के उड़िया बाबा आश्रम के कार्यक्रम के रद होने का कारण आश्रम प्रबंधन को स्पष्ट नहीं किया गया। हालांकि इसके पीछे मार्ग का संकरा होने को बताया गया। चर्चा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के आश्रम के ट्रस्टियों में से एक हैं। हाल में माघ मेले में गंगा स्नान के बाद उठे विवाद के कारण चर्चा में रहे हैं।
दावानल कुंड क्षेत्र स्थित उड़िया बाबा आश्रम में स्वामी पूर्णानंद तीर्थ उड़िया बाबा महाराज का 77वां निर्वाण उत्सव मनाया जा रहा है। इस बीच शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का परिवार के साथ कार्यक्रम में शामिल होना प्रस्तावित था, लेकिन 18 मार्च को दोपहर लगभग 2 बजे राष्ट्रपति के कार्यक्रम के रिहर्सल के बाद 2.27 बजे गृह मंत्रालय से आश्रम के प्रबंधक ट्रस्टी कुलदीप दुबे के पास कार्यक्रम निरस्त का संदेश आया। आश्रम के प्रबंधक ट्रस्टी ने जब जिला प्रशासन ने कार्यक्रम निरस्त किए जाने का कारण जानना चाहा तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर उन्होंने राष्ट्रपति भवन से संपर्क कर कारण जाना। बताया गया कि आश्रम का रास्ता संकरा है। रास्ते में मकान पुराने हैं। आश्रम में कार्यक्रम का समय 30 मिनट निर्धारित था, इसमें 10 मिनट विश्राम और 20 मिनट निर्वाण उत्सव में शामिल होना था, लेकिन रिहर्सल में इससे अधिक समय लग जाने के कारण राष्ट्रपति का आना रद्द हो गया।
आश्रम के प्रबंध ट्रस्टी कुलदीप दुबे ने बताया कि जिला प्रशासन को निरीक्षण करके पहले ही राष्ट्रपति का कार्यक्रम स्पष्ट करना चाहिए था। राष्ट्रपति के आगमन की सूचना पर पिछले 15 दिनों से तैयारी की गईं, लाखों रुपये खर्च किया गया। तीन कक्ष विशेष तौर पर तैयार किए गए, लेकिन ऐन वक्त पर कार्यक्रम रद्द कर दिया। उनका कहना है कि ट्रस्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अकेले ट्रस्टी नहीं हैं। अन्य संतजन भी ट्रस्टी हैं। यह आश्रम 1935 से संचालित है।