फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: ठाकुर श्रीबांकेबिहारी का प्राकट्य उत्सव आज, तैयारियां पूरी

विज्ञापन
मथुरा। बांकेबिहारी मंदिर में की गई सजावट। - फोटो : mathura
विज्ञापन
वृंदावन (मथुरा)। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी का प्राकट्य उत्सव शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिर के सेवायत गोस्वामी और प्रबंधन द्वारा तैयारी पूरी कर ली गई है। सुबह मंदिर में आराध्य का महाभिषेक किया जाएगा। वहीं ठाकुरजी की प्राकट्य स्थली निधिवन में भी भोर में अभिषेक होगा। इसके बाद धूमधाम से बधाई शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें देश के कई बड़े शहरों से बैंड शामिल होंगे। पश्मीना की जड़ावदार पीले रंग की पोशाक ठाकुर बांकेबिहारी धारण करेंगे।
विज्ञापन

मंदिर में आराध्य बांकेबिहारी का सुबह सात बजे सेवायत गोस्वामी द्वारा महाभिषेक किया जाएगा। इस दौरान गर्भगृह का पर्दा लगा रहेगा। मंदिर के सेवायत गोपी गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को जड़ी बूटियों और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें पीले रंग की पोशाक धारण कराई जाएगी। आराध्य के प्राकट्योत्सव पर पश्मीना की जड़ावदार पोशाक दिल्ली से तैयार कराई गई है। उसे ठाकुरजी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे।
ठाकुरजी का भव्य शृंगार किया जाएगा। सेवायत गोस्वामी ने बताया कि ब्रज में बच्चे का जन्म होने पर हलुआ का भोग लगाने की परंपरा है। इसलिए आराध्य के प्राकट्य उत्सव पर मोहन भोग यानी बादाम और केसर का हलुआ का भोग लगाया जाएगा। इसके अलावा सुबह और शाम की बेला में सेवायत गोस्वामियों द्वारा ठाकुरजी को छप्पन भोग लगाए जाएंगे। इसके अलाव केसर हलुआ, मुंह की दाल का हलुआ का भी भोग लगाकर भक्तों को वितरित किया जाएगा। मंदिर के द्वार पर नफीरी एवं ढोल ताशे बजाए जाएंगे। वहीं सेवायत गोस्वामियों द्वारा बधाई गायन किया जाएगा।
विज्ञापन

रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया मंदिर
बिहार पंचमी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के प्राकट्य उत्सव की तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं। मंदिर के अंदर जगमोहन, चौक को रंग-बिरंगे गुब्बारों और पुष्पों से सजाया गया है। मंदिर के बाहर चबूतरा पर भी सजावट की गई है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर शिखर तक विद्युत झालरों से सजाया गया है। इसके अलावा मंदिर प्रबंधन ने देश-विदेश से प्राकट्योत्सव पर बांकेबिहारी मंदिर एवं निधिवन से निकलने वाली बधाई शोभायात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए 70 अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

देश के कई बड़े शहरों के बैंड बधाई शोभायात्रा में होंगे शामिल
ठाकुर बांकेबिहारी के प्राकट्य उत्सव पर प्राकट्य स्थली निधिवन से सुबह आठ बजे से बधाई शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी। मंदिर के प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा ने बताया कि पारंपरिक सवारी में राया और मथुरा की शहनाई पार्टी एवं पांच बड़े बैंड शामिल होंगे। इनमें मुंबई का शिवगर्जना बैंड, पीएसएम बैंड, सूरत, नागपुर से भी बैंड सवारी की शोभा बढ़ाएंगे। आठ झांकियां निकाली जाएंगी। इनमें चांदी के रथ पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदासजी सवारी के साथ ठाकुर बांकेबिहारी, विट्ठलविपुल महाराज, जगन्नाथजी, गणेश भगवान, हनुमान महाराज, ठाकुर राधाकृष्ण और शिव परिवार की झांकियां शामिल भक्तों की आकर्षक का केंद्र रहेंगी।
इसके अलावा शोभायात्रा में बेरीवाला की हवेली से मारवाड़ी महिला भक्तों द्वारा डांडिया नृत्य एवं बधाई गायन करते हुए चलेंगी। हरिदास नगर से कीर्तन मंडली भी शामिल होंगी। यह बधाई शोभायात्रा निधिवन से सुबह आठ बजे से शुरू होकर नगर भ्रमण करते हुए बांकेबिहारी मंदिर लगभग दोपहर एक बजे पहुंचेगी। स्वामी हरिदास महाराज का पुष्पों से सजा डोला सेवायत गोस्वामी बांकेबिहारी के समीप ले जाएंगे। मान्यता है कि यहां स्वामी हरिदास आराध्य बांकेबिहारी को प्राकट्य की बधाई देते हैं इसके बाद ही ठाकुरजी का भोग लगाया जाता है और मंदिर में आराध्य के प्राकट्य की खुशी में उल्लास छा जाता है।

स्वामी हरिदासजी ने किया था ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य
ठाकुर बांकेबिहारी को शास्त्रीय संगीत के जनक कहे जाने वाले स्वामी हरिदास ने अपनी संगीत साधना से निधिवन में अगहन माह की पंचमी तिथि को प्रकट किया था। इस पंचमी तिथि को ब्रज में बिहार पंचमी कहा जाता है। इसे अवध में विवाह पंचमी कहते हैं। बांकेबिहारी के भोग के लिए 108 किलो मक्खन बनाया गया है। निधिवन के सेवायत भीखचंद गोस्वामी ने बताया कि आराध्य बांकेबिहारी को सबसे प्रिय मक्खन है। इस बार भक्तों की इच्छा हुई कि 108 किलो हाथों से बने मक्खन का भोग लगाया जाए। इसलिए उनकी सेवा के लिए मक्खन तैयार किया गया है। मक्खन डॉक्टर काऊ कल्पवृक्ष फाउंडेशन द्वारा बनाया गया है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के प्राकट्य उत्सव पर निधिवन से मंदिर तक निकलने वाली बधाई शोभायात्रा में 56 भक्तजन 108 किलो मक्खन को 56 मटकियों में भरकर सिर पर रखकर चलेंगे और बांकेबिहारी मंदिर में भोग के रूप में आराध्य को सेवित करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें