मथुरा। प्रधान पतियों की पंचायती से महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। महिला प्रधानों की जगह तमाम कार्य उनके पति कर रहे हैं। बैठकों में महिला प्रधान घूंघट निकाले बैठीं रहती हैं और पति की प्रधानता रहती है, लेकिन अब महिलाओं को घूंघट से बाहर निकलना पड़ेगा। सरकारी बैठकों में महिला प्रधानों की उपस्थिति ही मान्य होगी। उनके जिला पंचायत राज अधिकारी ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए हैं।
जनपद की 495 ग्राम पंचायतों में से 203 पंचायतों की प्रधान महिलाएं हैं। इनमें से कई महिला प्रधानों का काम प्रतिनिधियों के भरोसे चल रहा है। सरकारी बैठकों में शामिल होने की बात हो या फिर अधिकारियों के दफ्तर में जाने की। महिला प्रधान की जगह प्रतिनिधि ही पहुंचते हैं। बीते दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए महिला सशक्तिकरण की मंशा पर सवाल खड़े किए थे।
अपने अधिकारों के लिए जागरूक होना होगा
महिला प्रधानों को अपने अधिकार के लिए खुद आगे आना पड़ेगा। धूंघट की ओट से बाहर निकलना होगा। सरकारी बैठकों में शामिल होना पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के दफ्तर में भी जाना होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी किरन चौधरी ने बताया कि आगे होने वाली बैठकों में केवल प्रधानों को ही शामिल किया जाएगा। प्रधान के स्थान पर कोई दूसरा व्यक्ति प्रतिनिधि बनकर आएगा, तो उसे बैठक में शामिल होने नहीं दिया जाएगा। महिला प्रधान के खुद सामने आने पर ही उनकी उपस्थिति मान्य की जाएगी।
महिला ब्लॉक प्रमुखों की संख्या रही कम
जनपद के 10 ब्लॉक में सात की प्रमुख महिलाएं हैं। पूर्व में हुई सरकारी बैठकों में यही देखने को मिला है कि अधिकतर महिला प्रधान और ब्लॉक प्रमुख घर पर रहती थीं। उनकी जगह बेटा या पति प्रतिनिधि बनकर बैठक में शामिल होने आते थे। अब महिला प्रधान और ब्लॉक प्रमुख ऐसा नहीं कर पाएंगी। खुद सामने आने पर ही अधिकारी उनकी सुनवाई करेंगे।
सरकारी बैठकों में शामिल होने के लिए महिला प्रधानों और प्रमुखों को खुद आना होगा। उनके स्थान पर किसी दूसरे की उपस्थिति मान्य नहीं की जाएगी।
- किरन चौधरी, जिला पंचायत राज अधिकारी
ये बहुत अच्छा है। मैं खुद हर बैठक में शामिल होती हूं। अन्य महिला प्रधानों से भी अपील करूंगी कि वो अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। बैठकों में खुद शामिल हों।- सावित्री देवी, प्रधान जुनसिटी
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सभी महिला प्रधानों को सरकारी बैठकों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। महिला प्रधान बैठकों में शामिल होंगी तो उन्हें बहुत कुछ जानकारियां मिलेंगी। इसका फायदा लोगों का मिलेगा।
ममता, प्रधान जैंत
ऐसा ही होना चाहिए। महिला प्रधान जब खुद आगे रहेंगी तो समाज की अन्य महिलाओं और युवतियों को जागरूक कर पाएंगी। उन्हें हर योजना के बारे में जानकारी हो पाएगी।
हेमलता, प्रधान शाहपुर जाटान