मथुरा। यमुना प्रदूषण से जुड़े मामले में 24 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के न्यायाधीश अरुण मिश्रा व न्यायाधीश इंदिरा बैनर्जी के समक्ष सुनवाई होगी। मथुरा के याचिकाकर्ता तपेश भारद्वाज द्वारा वर्ष 2016 में एनजीटी में एक याचिका दाखिल कर यह आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद व छावनी परिषद द्वारा नगर का कूड़ा सीधे यमुना में बहाया जा रहा है।
उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि छावनी परिषद मथुरा, डेरी फार्म के नजदीक यमुना किनारे कचरा डाल रहा है जो कि पानी के साथ बह कर सीधे यमुना में जा रहा है। इस मामले पर बहस कर याचिकाकर्ता तपेश भारद्वाज के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद, छावनी परिषद व जिला प्रशासन पर जुर्माना लगाने की मांग की थी।
वर्ष 2017 में एनजीटी के प्रधान न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार द्वारा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया तथा छावनी परिषद मथुरा पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जिसके बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर जुर्माना खत्म करने की मांग की जिस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी की तरफ से जुर्माना बढ़ाए जाने की मांग रखी गई। अब इस मामले में 24 जनवरी को अहम सुनवाई में तय होगा कि यमुना प्रदूषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय किया आदेश देगा।