शहर में यमुना में गिर रहे नालों पर हंगामा तो खड़ा होता है लेकिन देहात क्षेत्र में गिरते नालों पर तो बात ही नहीं होती। कई नाले तो इतने बड़े हैं कि नहरों का रूप में दिखते हैं और गंदगी यमुना में पहुंचा देते हैं। ऐसा ही है सुनरख का बड़ा नाला।
यह बड़ा नाला कोसी से शुरू होकर छाता, शेरगढ़, सेही, परखम गूजर, बाबूगढ़, सकराया और सुनरख होते हुए सीधे यमुना में गिरता है। नाले में कोसी औद्योगिक क्षेत्र का कचरा भी आता है और सीधे यमुना में गिर जाता है। कोढ़ में खाज ये कि इसी बड़े नाले में ही जैंत का भी नाला मिलता है।
वृंदावन में यमुना में गिरते नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए शासन और प्रशासन दावे बहुत करता है। योजनाएं बनती हैं और उनके संचालन पर करोड़ों रुपये खर्च भी किए जाते हैं लेकिन यमुना की स्थिति बिगड़ ही रही है।
गांव सुनरख में लगाएं ट्रीटमेंट प्लांट
वृंदावन। गांव सुनरख निवासी गंगा शरण गौतम, नेहना बघेल, सौरभ, नवीन, मुरारी, रमन बिहारी निवासी भी सुनरख नाले के यमुना में गिरने की स्थिति को भयावह बताते हैं। गांव प्रधान जयपाल ने कहा कि प्रशासन को इस नाले के पानी ट्रीट करने के लिए सुनरख में ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाना चाहिए। यमुना में प्रदूषण की समस्या खत्म होगी और शोधित पानी को गांववाले सिंचाई में भी प्रयोग कर सकेेंगे।
बंद हो सुनरख नाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना में घाट बनाने से पहले यमुना का शुद्धिकरण जरूरी है। बिना सुनरख नाला बंद किए वृंदावन में यमुना शुद्धिकरण की कल्पना नहीं की जा सकती। वृंदावन के 18 नालों से अधिक गंदा पानी इस नाले से यमुना में गिर रहा है।