मथुरा। मूलत: टाउनशिप क्षेत्र के गांव बरारी निवासी सिपाही जितेंद्र कानपुर में हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। वर्तमान में शहीद का परिवार गांव नवादा तंतूरा में रह रहा है। 2018 बैच के सिपाही के शहीद होने की जानकारी गांव पहुंची तो परिवार और गांव में कोहराम मच गया। लोगों के चेहरों पर गम और गुस्सा एक साथ दिख रहा था। ग्रामीण जितेंद्र की बहादुरी को सलाम भी कर रहे हैं।
शुक्रवार सुबह करीब 7:30 बजे सिपाही जितेंद्र के भाई जिनेंद्र के मोबाइल पर कानपुर के थाना विठूर से फोन आया। फोन करने वाले ने जानकारी दी कि मुठभेड़ में जितेंद्र की मौत हो चुकी है। जिनेंद्र ने यह जानकारी पिता तीर्थपाल को दी और पिता-पुत्र तथा मां रानी देवी कानपुर को रवाना हो गए।
उस समय वह गांव नवादा स्थित अपने घर पर थे। घर पर एक भाई सुरेंद्र तथा बहन पूजा को छोड़ गए। सूचना मिलते ही भाई तथा बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजन तथा शुभचिंतक घर पहुंच रहे थे। सीओ रिफाइनरी वरुण कुमार, हाईवे थानाध्यक्ष विनोद कुमार यादव तथा अन्य पुलिस अधिकारी परिजन को सांत्वना दे रहे थे।
2018 बैच का था जितेंद्र
जितेंद्र 2018 बैच के सिपाही थे। उनकी पहली तैनाती कानपुर के विठूर थाने पर थी। मुलायम सिंह सरकार में रोकी गईं कुछ भर्तियों में से एक जितेंद्र भी थे। भर्ती के बाद उन्हें पहली तैनाती विठूर थाने में मिली।
बहन-भाई में सबसे बड़े तथा अविवाहित थे
जितेंद्र के पिता करीब 12 वर्ष पूर्व अपना पैतृक गांव बरारी छोड़कर नवादा तंतूरा सोमनाथ मैरिज होम के निकट आकर रहने लगे थे। उन्होंने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए ही गांव छोड़ा था। सबसे बड़ा पुत्र जितेंद्र, उससे छोटा जिनेंद्र, पूजा तथा सुरेंद्र हैं।
जितेंद्र सबसे बड़े थे और उसकी उम्र करीब 26 वर्ष थी और अविवाहित थे। यह जानकारी देते-देते जितेंद्र के भाई सुरेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। बताया कि भैया विगत 23 जून को एक सप्ताह की छुट्टी काटकर गए थे। एक जुलाई को मां से फोन पर बातचीत भी हुई थी।
शव रात तक आ पाएगा
शहीद सिपाही जितेंद्र के घर पर पहुंचे हाईवे थानाध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने बताया कि जितेंद्र के पिता शव लेने के लिए कानपुर गए हैं क्योंकि वहां पर मुख्यमंत्री पहुंचकर शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देंगे। उनका यह कार्यक्रम दोपहर तीन बजे है। इसके बाद ही वह कानपुर से चलेंगे, करीब रात में जितेंद्र का शव मथुरा आ पाएगा।