मथुरा। रविवार से पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) शुरू हो रहा है। लोग अपने पितरों को जलदान कर तर्पण करेंगे। इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान पितरों का श्राद्ध भी किया जाएगा।
आचार्य पंडित अमित भारद्वाज ने बताया कि आश्विन मास में मनु द्वारा प्रारंभ की गई परंपरा का मुख्य तत्व श्रद्धा है। श्राद्ध पितृ ऋण चुकाने की एक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि ऋषि मुनियों द्वारा व धर्मग्रंथों में भी श्राद्ध की महात्मा का वर्णन किया गया है। श्राद्ध के समय उच्चारित नाम, गोत्र व मंत्रों से श्राद्ध में अर्पित द्रव्य वायु रूप में प्रविष्ट होकर हव्य के रूप उन सूक्ष्म रूप धारण कर आने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं। श्राद्ध के द्रव्य तिल, उड़द, जौ, चावल, जल कंदमूल, फल व घृत हैं। पितरों का स्थान दक्षिण दिशा में होने के कारण श्राद्ध दक्षिणामुख होकर किया जाता है। जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखा जाता है। श्राद्ध में जड़ सहित कुश प्रयुक्त की जाती है, क्योंकि कुश का ऊपरी भाग देवताओं का, मध्य भाग मनुष्य का व जड़ें पितरों की होती हैं। इस बार श्राद्ध पक्ष पूरे 15 दिन का होगा जो 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगा।
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श्राद्ध पक्ष में क्या करें
पंडित अमित भारद्वाज ने बताया कि पितृपक्ष में प्रतिदिन गौ ग्रास (भोजन) निकालने के बाद तर्पण करना चाहिए। जिस दिन श्राद्ध कि तिथि हो उस दिन ठाकुर जी का भोग लगाने के पश्चात गौ ग्रास के अलावा जलचर, नभचर व श्वान के लिए भी ग्रास निकालें। इसके बाद सात्विक व योग्य ब्राह्मण को साथ भोजन कराने के बाद दान करें।
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चंदग्रहण के सूतक से पहले करना होगा श्राद्ध
इस बार 7 सितंबर को चंद्रगहण पड़ रहा है। पंडित अमित भारद्वाज ने बताया कि चंदग्रहण का सूतक दोपहर 12.57 बजे से शुरू हो जाएगा। ऐसे में पहले दिन यानी पूर्णिमा का श्राद्ध सूतक लगने से पहले किया जाएगा।