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बंदरों से मुक्ति के लिए धरने पर बैठे लोग

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मथुरा। बंदरों के बढ़ते उत्पात से तंग आए लोगों ने अब इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए धरना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने बंदरों को पकड़वाने की मांग को लेकर रविवार को हनुमान गली में धरना दिया।
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इस मौके पर जाग्रति ब्रज मंडल अध्यक्ष गंगा रानी चतुर्वेदी ने बताया कि बंदरों का आतंक शहर में दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं। बच्चे और महिलाएं घर से निकलने में डरने लगे हैं। बंदरों के कारण कई लोगों की जान पर आ गई है। जब भी लोग इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधि और अफसरों के द्वार पर चक्कर लगाते हैं तो मंकी सफारी की बात होने लगती है लेकिन धरातल पर इस दिशा में कुछ नहीं होता है।
धरनारत रेनू उपाध्याय ने बताया कि घरों से बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। गली-गली और छतों पर बंदरों का कब्जा रहता है। इस दौरान सभी ने इस समस्या के समाधान के ठोस उपाय करने, जिला अस्पताल में एंटी रैवीज इंजेक्शनाें की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने सहित अनेक मांग की।
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धरना देने वालों में भूपेंद्र चतुर्वेदी, गंगारानी चतुर्वेदी, प्रीति चतुर्वेदी, विश्वधर्म रक्षक दल के विजय चतुर्वेदी, कपिलानंद, नरेंद्र एम चतुर्वेदी, संजय हरियाणा, राकेश चतुर्वेदी, उपेंद्र चतुर्वेदी, रेणु उपाध्याय, डॉ. रमा चतुर्वेदी, चित्रा चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद रहे।
संसद में उठा था बंदरों का मामला
सांसद हेमा मालिनी मथुरा-वृंदावन में बंदरों के आतंक का मुद्दा संसद में उठा चुकी हैं। इसका समर्थन तत्कालीन टीएमसी के सांसद ने भी किया था। कहा था कि उन्हें भी वॄंदावन में इस स्थिति का सामना करना पड़ा था।
चश्मा और मोबाइल छीनते हैं वृंदावन के बंदर
मथुरा के साथ वृंदावन में भी यह समस्या गंभीर है। वृंदावन में इसका शिकार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु होते हैं। वृंदावन में बंदर पर्स, चश्मा, मोबाइल और कैप छीन ले जाते हैं। फ्रूटी देने पर ही श्रद्धालुओं को चश्मा, मोबाइल आदि वापस करते हैं लेकिन वे उसे उपयोग काबिल नहीं छोड़ते हैं। वृंदावन के लोगों ने भी इस समस्या को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किए हैं।
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