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Mathura News: पौराणिक स्वरूप में नजर आएंगे मथुरा-वृंदावन के परिक्रमा मार्ग

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मथुरा। मथुरा-वृंदावन में परिक्रमा मार्ग का कायाकल्प होगा। इसमें फसाड लाइटों के साथ-साथ राजस्थानी शैली श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। साथ ही हेरिटेज लुक समेत वृंदावन-मथुरा की विरासत ब्रज संस्कृृति की झलक भी दिखाई देगी। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से परिक्रमा मार्ग की दशा बदलेगा।
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अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की ब्रजभूमि के पौराणिक व धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार व पुराने स्वरूप में विकसित करने की मंशा है। इसी के तहत उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने मथुरा-वृंदावन के परिक्रमा मार्ग को पौराणिक स्वरूप में सौंदर्यीकरण कराने की योजना बनाई है। ब्रज की सांस्कृतिक झलक के साथ राजस्थानी शैली परिक्रमा मार्ग के दोनों तरफ दिखाई देखी।

जगह-जगह श्रीकृष्ण-राधा की कलाकृतियां, कृष्णकालीन पौधे के साथ-साथ फसाड लाइटें परिक्रमा मार्ग की आभा में सुंदरता बिखेरेंगी। इसके अलावा अस्तित्व खो चुके मथुरा-वृंदावन के कुंडों को चिन्हित कर विकसित किए जाएंगे। इनके आसपास के क्षेत्रों को हेरिटेज लुक दिया जाएगा। इसमें हाट बाजार, लाइट साउंड शो, हस्तशिल्प बाजार, कला तथा सांस्कृतिक केंद्र, ध्यान केंद्र के साथ-साथ श्रद्धालुओं की ठहरने के लिए धर्मशाला का भी निर्माण कराया जाएगा।
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विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। दो चरणों में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से परिक्रमा मार्ग का कायाकल्प होगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नगर निगम इसकी देखरेख करेगा।

- एसबी सिंह, सीईओ, उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद


यह है मान्यता

मथुरा में दिवाली बाद अक्षय नवमी पर श्रद्धालु करीब 15 किमी की परिक्रमा करते हैं। यह परिक्रमा विश्राम घाट से शुरू होकर शहर के विभिन्न स्थानों से होते हुए विश्राम घाट पर ही खत्म होती है। वैसे जो श्रद्धालु जहां से परिक्रमा प्रारंभ करते हैं, वह वहीं समाप्त करेंगे। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद पूरे शहर की परिक्रमा लगाई थी। वहीं वृंदावन में प्रतिमाह अमावस्या व एकादशी पर पंचकोसी परिक्रमा लगाई जाती है।
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