राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने 500 साल पहले कृष्ण भक्ति और मानवता का जो अनूठा संदेश दिया था, वह आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने भक्ति के इस संदेश को संगीत और नृत्य के माध्यम से देने का ऐसा मार्ग निकाला कि वह जन-जन की आराधना का मार्ग बन गया। हकीकत में चैतन्य महाप्रभु ने मानवता एवं समानता का संदेश दिया।
राष्ट्रपति परमेश्वरी देवी धानुका विद्या मंदिर में आयोजित चैतन्य महाप्रभु ब्रज वृंदावन आगमन पंचशती महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमन को 500 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को आयोजित समारोह के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि महाप्रभु के इस पंचशती समारोह में शामिल होने पर मैं अपने आपको भाग्यशाली मानता हूं।
24 साल की आयु में जब चैतन्य महाप्रभु ने अपना घर छोड़ा वह क्षण पश्चिम बंगाल के लिए ऐतिहासिक बन गया। उन्होंने लोगों को बताया कि भक्ति का सही तरीका भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण है। इसका रास्ता प्रेम और कम्पैसन से होकर जाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विविधता से भरा देश है। यहां पर विभिन्न धर्म, जाति, संप्रदाय, भाषाएं, परंपराएं हैं। भारत के संविधान, यहां के सांस्कृतिक मूल्यों एवं सभ्यता की यह विशेषता है कि वह इन सभी को अपने अंदर समेटे हुए है।
चैतन्य महाप्रभु ने यह सिखाया कि अनेकता में एकता को किस प्रकार से स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि मनुष्य से ऊपर कुछ भी नहीं है।
वे जब वृंदावन आए तो उसका चमत्कारिक प्रभाव इसलिए हुआ कि उन्होंने लोगों को भगवत नाम बहुत ही आसान तरीका से लेना बताया। इसमें किसी जाति, धर्म, भाषा, प्रांत की कोई बंदिश न थी।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की कुछ हस्तियों का जिक्र भी किया, जिन्होंने 1757 के भक्ति मूवमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्यक्रम सभी के लिए न केवल स्वयं को चार्ज करने का एक ऐसा महत्वपूर्ण अवसर है बल्कि चैतन्य महाप्रभु के भेद रहित, मानवता और प्रेम के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने का अवसर भी है।
इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि 500 साल पहले सिर्फ हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से चैतन्य महाप्रभु ने वैष्णव धर्म का प्रचार और विकास किया। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दुनिया को दिया।
भले ही आज भी कुष्ठ रोगियों से लोग दूर भागते हों, लेकिन चैतन्य महाप्रभु 500 साल पहले इनकी सेवा करते थे।
सांसद हेमामालिनी ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने वृंदावन को पुनर्स्थापित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की इस लीला स्थली को देश और दुनिया में सभी धर्म, जाति और समुदायों तक पहुंचाने का काम किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य पद्मनाभ गोस्वामी ने की और पद्म लोचन ने आभार जताया।
इस मौके पर वन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, शिशुपाल सिंह, कांग्रेस के नेता विधान मंडल प्रदीप माथुर, जीएलए कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, वृंदावन चेयरमैन मुकेश गौतम, इंद्रेश उपाध्याय, पूजा सेठ भी मौजूद रहे।