मथुरा। छाता विकास खंड की ग्राम पंचायत फालैन में विकास कार्यों के भुगतान विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में पंचायत सचिव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से ठेकेदारों का करीब 45 लाख रुपया भुगतान करने का आदेश दिया गया है। मामला बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए कार्यादेश जारी करने और अभिलेखों में गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है।
जानकारी के अनुसार, मैसर्स संजय कुमार एवं मैसर्स रवि कुमार को ग्राम पंचायत फालैन में सड़क, नाली और खड़ंजा सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए कार्यादेश दिए गए थे। कार्य पूरा होने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर दोनों ठेकेदारों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता के माध्यम से कराई। जांच के लिए जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर कीं। रिपोर्ट में पाया गया कि उपलब्ध अभिलेखों में ग्राम प्रधान और निर्माण कार्य समिति के हस्ताक्षर नहीं थे। कार्य मूल्यांकन पुस्तिका में कार्य प्रारंभ, पूर्णता और मापन की तिथि जैसी आवश्यक प्रविष्टियां भी दर्ज नहीं थीं।
इसके अलावा निविदा संबंधी दस्तावेजों पर भी केवल पंचायत सचिव के हस्ताक्षर मिले, जबकि अन्य सक्षम अधिकारियों और समितियों की स्वीकृति नहीं ली गई थी। जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालत ने दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के साथ ही ठेकेदारों के बकाया भुगतान को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अनुपालन में जिला पंचायत राज अधिकारी धनंजय जायसवाल ने पंचायत सचिव सुरेंद्र सिंह को लगभग 45 लाख रुपये का भुगतान अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर करने के आदेश जारी किए। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि हाल की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भुगतान पंचायत सचिव से ही कराया जाए। मामले में विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।