बात रखते पार्षद और होटल संचालक राधाकृष्ण पाठक।
वृंदावन। दिल्ली और लखनऊ में आग लगने की घटना के बाद एमवीडीए द्वारा नगर में होटल एवं गेस्टहाउस को सील करने की कार्रवाई के बाद एमवीडीए ने नर्म रुख अपनाया है। होटल उद्योग व्यापारियों की मांग पर टीएफसी पर्यटक सुविधा केंद्र पर शुक्रवार को एमवीडीए के जेई और एई की टीम व्यापारियों को सीलिंग की कार्रवाई का कारण और उनकी कमियां बताएगी। उन कमियों को उन्हें 15 दिन पूरा करना होगा। इस संबंध में शपथ पत्र देने पर प्रतिष्ठानों की सील खोल दी जाएगी। अधिकारियों की इस घोषणा पर व्यापारियों ने राहत की सांस ली।
गुरुवार शाम को पर्यटक सुविधा केंद्र में एमवीडीए सचिव आशीष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र एवं मथुरा सीएफओ अरुण सिंह ने होटल एवं गेस्टहाउस संचालकों के साथ बैठक की। इसमें नगर निगम के पार्षद एवं होटल संचालक राधाकृष्ण पाठक ने आरोप लगाया कि रुक्मिणी विहार और चैतन्य विहार में छोटे होटल और गेस्टहाउस संचालकों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई, लेकिन आश्रम भूमि पर बड़े होटल बनाने वालों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। सभी में नियमों को ताक पर रखकर व्यवसाय किया जा रहा है। चेतावनी दी कि यदि इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वह मंडलायुक्त से मुलाकात कर शिकायत की जाएगी। उन्होंने बताया कि एमवीडीए के अधिकारी बनकर सुबह पांच बजे कुछ लोग आए और गेस्टहाउस को लेकर दबाव बनाने का प्रयास करने लगे। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एमवीडीए को कार्रवाई से पहले नोटिस देने चाहिए।
व्यापारी नेता आलोक बंसल ने कहा कि एमवीडीए को होटल और गेस्टहाउस की सील खोल देनी चाहिए। नगर में अधिकांश छोटे गेस्ट हाउसों को होम स्टे के रूप में मान्यता दी जाए। होटलों को सिंगल विंडो सिस्टम से एनओसी और उनकी समस्याओं का निदान किया जाए। भाजपा नेत्री मुदिता शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। ऐसे में एमवीडीए को होटल और गेस्टहाउस संचालकों को राहत देते हुए उनसे लिए जाने वाले शुल्क में छूट प्रदान करे।
टीएफसी पर दूर होंगी समस्याएं :
एमवीडीए के सचिव आशीष कुमार ने बताया कि होटल और गेस्टहाउस संचालकों की सुविधा के लिए शुक्रवार को टीएफसी पर एमवीडीए टीम उपलब्ध होगी। जो कि सीलिंग की कार्रवाई का कारण और उनकी कमियों के बारे में उन्हें बताएगी। वह कमियां को दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। संचालक कमियां दूर करने संबंधी शपथपत्र जमा कराएं। इसके बाद उनकी सील खोल दी जाएगी। शपथपत्र देने के निर्धारित समय में कमियों का दूर नहीं किया गया तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।