चौपाल पर बैठकर बुजुर्ग, नौजवान और बच्चों को आजादी की जंग के किस्से सुना कर उमंग भरने वाले योद्धा पंडित भंवर सिंह शर्मा अब नहीं रहे। जिले में जंगे आजादी के एक मात्र जीवित स्तंभ स्वरूप बचे सेनानी ने शनिवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। गोवर्धन स्थित निज आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
बता दें कि स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर देश को आजाद कराने वालों की जिले में लंबी फेहरिस्त थी। आजादी के बाद जिले कुल 702 सेनानी थे जो स्वतंत्र भारत की किशोर और युवा पीढ़ी को देश के लिए कुछ कर गुजरने की ऊर्जा प्रदान करते थे। समय के साथ एक-एक की विदाई के बाद जिले में पंडित भंवर सिंह शर्मा ही जीवित स्तंभ के रूप में रहे। शनिवार को सुबह करीब 8:30 बजे भंवर सिंह शर्मा के निधन से मथुरा जनपद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विहीन हो गया।
निधन की सूचना पर दोपहर को जिलाधिकारी निखिल चंद्र शुक्ला, एसएसपी बबलू कुमार, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित विभिन्न अधिकारी उनके निवास स्थान पहुंच गए। सभी स्वतंत्रता सेनानी के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जिलाधिकारी ने भंवर सिंह शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र कैलाश चंद्र शर्मा को सांत्वना दी।
दोपहर दो बजे बैंड बाजों के साथ उनकी अंतिम यात्रा कस्बा में भ्रमण के बाद परिक्रमा मार्ग स्थित राम बाबा शमशान स्थल पहुचीं। यहां तिरंगा में लिपटे पार्थिव शरीर पर एसडीएम गोवर्धन और सीओ गोवर्धन ने पुषा चक्र अर्पित किए। दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस के जवानों ने राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान भारत माता की जय और अमर शहीदों की जयजयकार गूंजती रही। ज्येष्ठ पुत्र कैलाश चंद्र शर्मा ने चिता को मुखाग्नि दी। भंवर सिंह शर्मा अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र, चार पौत्र और परपौत्रों सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
अब कौन सुनाएगा आजादी के किस्से
गोवर्धन के साथ-साथ जिले भर में चर्चा है कि भंवर सिंह के जाने के बाद अब कौन आजादी के किस्से सुनाएगा। परिवार वाले बताते हैं कि बीते कई रोज से वे बीमार चल रहे थे, लेकिन 15 अगस्त के कार्यक्रम का बुलावा पहुंचा तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। देशभक्ति का पूरा जज्बा लेकर वे कार्यक्रम में गए थे। भारत माता के जयकारे लगाने के दौरान नौजवान से ज्यादा जोश और उमंग उनमें नजर आती थी।
भगत सिंह के बलिदान ने बनाया देशभक्त
स्वतंत्रता सेनानी भंवर सिंह शर्मा का जन्म वर्ष 1917 में राजस्थान की तहसील कुम्हेर के गांव में आऊआ में हुआ था। चार साल की उम्र में माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी देखरेख गोवर्धन के दानघाटी मंदिर निकट स्थित किशोर अनाथालय में हुई। शहीद भगत सिंह को फांसी के बाद क्रांतिकारियों द्वारा निकाले गए जुलूस ने उनके मन में देशभक्ति की चिंगारी जला दी। भारत छोड़ो आंदोलन तक वे पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। रेल की पटरी उखाड़ने और पोस्ट आफिस जलाने में उनकी अहम भूमिका रही। 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भागीदारी पर उन्हें एक वर्ष की कैद और 50 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। वह महात्मा गांधी और विनोबा भावे के संपर्क में भी रहे। आजाद भारत में अध्यापक, पंचायत सचिव, खादी भंडार के प्रबंधक सहित टाउन एरिया गोवर्धन में बख्शी की सरकारी नौकरियों में उन्होंने कार्य किया।
श्रद्धांजलि को उमड़ा हुजूम
भंवर सिंह शर्मा के निधन की खबर पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुडे़ लोगों ने गोवर्धन पहुंचकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। पूर्व विधायक हुकुम चंद्र तिवारी, पूर्व सांसद और भाजपा जिलाध्यक्ष तेजवीर सिंह, गोवर्धन विधायक राजकुमार रावत, भाजपा नेता कृष्ण कुमार शर्मा मुन्ना भैय्या, रालोद नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह, सपा नेता ठाकुर किशोर सिंह, मुकेश सिंह सिकरवार, पूर्व जिलाध्यक्ष गुरुदेव शर्मा, सभासद राजू अंजाना, भाजपा नेता मोहन लाल शर्मा, केशव मुखिया, पूर्व चेयरमैन श्याम विनोद शर्मा, व्यापारी नेता राम सिंघल आदि सहित सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
कलक्ट्रेट में दी गई श्रद्धांजलि
मथुरा (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रियल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने स्वतंत्रता सेनानी भंवर सिंह शर्मा के निधन पर श्रद्धांजलि दी। कलक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित शोकसभा में दो मिनट मौन रखा। अध्यक्षता एडीएम प्रशासन अजय कुमार अवस्थी ने की। इस दौरान एडीएम कानून व्यवस्था रमेशचंद्र, विशेषभूमि अध्यापित अधिकारी बृजभान सिंह राठौर, डिप्टी कलक्टर हर्षदेव पांडेय, एमपी सिंह, एसओसी राजकमल यादव, प्रशासनिक अधिकारी रमेश चंद्र, डीजीसी चंद्रमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष रामवीर शर्मा, कृष्ण गोपाल अग्रवाल, शरद शर्मा आदि मौजूद रहे।