ग्रामीण अंचल में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। आलम ये है कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद रिक्त चल रहे हैं।
इधर, मुख्यालय के महर्षि दयानंद अस्पताल की हालत भी चिकित्सकों की उपलब्धता के लिहाज से बदतर है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा आम लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन रहा है।
जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक केंद्र पर विशेषज्ञ चिकित्सक फिजीशियन, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया, गायनकोलॉजिस्ट तैनात होना चाहिए।
हालात ये हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सक के सभी 66 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाएं मजाक बनकर रह गई हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विवेक मिश्रा ने बताया कि जिले में मात्र फर्स्ट रेफरल यूनिट फरह और मांट में विशेषज्ञ चिकित्सक अरेंज किए गए हैं। शासन की ओर से स्वीकृत सभी 66 पद रिक्त होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।