प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई जा रहीं सड़कों की गुणवत्ता पर स्टेट क्वालिटी मानीटर (एसक्यूएम) ने सवाल खडे़ किए हैं। 17 करोड़ की लागत से बन रहीं 49.33 किलोमीटर लंबी सड़कों की क्ववालिटी पर स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारी पहले ही आपत्ति जता चुके हैं।
जिले में करीब छह साल बाद सांसद हेमामालिनी की पहल पर भारत सरकार से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पांच सड़कों की स्वीकृति मिली है। इसमें अब कार्य की गुणवत्ता विभागीय अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। इन पांच सड़कों के टेंडर 17 करोड़ में दो फर्म ने लिए थे। राजनेताओं के संरक्षण वाली इन फर्म के कार्य की गुणवत्ता पर पहले विभागीय अधिकारी ने अब स्टेट क्वालिटी मानीटर ने आपत्ति लगाई है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित छाता से पैगांव तक की सड़क के निर्माण पर रेड निशान लगा दिया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय से होगी शिकायत
विभागीय जांच रिपोर्ट के साथ इन सड़कों के कार्य की गुणवत्ता पर क्षेत्रीय विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह ने भी आपत्ति की हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अकबरपुर से पाली तक, अकबरपुर से बझेरा तक, कोसी-कोटवन कामर तक और शेरगढ़ की निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब है।
विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों ने भी इन सड़कों के निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत की है। वह इसकी शिकायत केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय से करेंगे।
किसी भी ठेेकेदार को मानकों के विपरीत काम नहीं करने दिया जाएगा। स्टेट क्वालिटी मानीटर की रिपोर्ट आ चुकी है। उसके अनुरूप निर्माण कार्य में सुधार कराया जाएगा।
-अजय सिंघल, एक्सईएन, आरईएस