मथुरा। बलदेव क्षेत्र में मक्का की फसल खराब होने की शिकायतों के बाद कृषि विशेषज्ञों की टीम ने शनिवार को दो गांवों में जाकर 12 किसानों से बातचीत की और उनकी मक्का की फसल का परीक्षण किया। शुरुआती जांच में पाया गया कि जिन किसानों ने 10 मार्च के बाद मक्का की बुआई की थी, उनकी फसल में अधिकांश भुट्टों के अंदर दाने ही नहीं पड़े हैं।
पछेती बुआई (लेट बुवाई) और मार्च-अप्रैल में अधिक तापमान को नुकसान की मुख्य वजह माना जा रहा है।शासन द्वारा गठित टीम के आगरा मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव, उप कृषि निदेशक प्रेमवीर सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. वाईके शर्मा, जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह और एक कंपनी के प्रतिनिधि ने कारब और दघेंटा के प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति को करीब से देखा। इस दौरान टीम ने पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए मौके पर ही पीड़ित किसानों के बयान दर्ज किए। किसानों ने बताया कि उन्होंने फसल में समय पर खाद, पानी और कीटनाशकों का छिड़काव किया था। पौधे भी अच्छी लंबाई के हो चुके हैं, लेकिन भुट्टों में दाना न बनने से उनकी पूरी लागत डूबने की कगार पर है।
इसके बाद टीम ने किसानों के खेतों में जाकर भुट्टे का परीक्षण किया। यहां एक तुलनात्मक अंतर पाया गया। जांच में पता चला कि जिन किसानों ने फरवरी की शुरुआत से लेकर 10 मार्च के बीच मक्का की बुवाई पूरी कर ली थी, उनकी फसल पूरी तरह सुरक्षित है। उसमें दानों का विकास ठीक हुआ है। देर से बोई गई फसल का जब पॉलिनेशन (परागकण क्रिया) का समय आया, तब तापमान बेहद उच्च स्तर पर पहुंच चुका था। अत्यधिक गर्मी के कारण परागकण सूख गए, जिससे भुट्टे खाली रह गए। फिलहाल जांच टीम छानबीन कर बिंदुवार विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है।