जिले की एक एनजीओ करोड़ों रुपये के नकद लेन-देन में फंस गई है। मामले में समाजसेवी संस्था को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उसका अनुदान भी रोक दिया है।
ये संस्था है जन कल्याण शिक्षण संस्थान प्रथम। अखिल भारतीय ब्रज समाज कल्याण संस्था कृष्णापुरी के तहत ये संस्था जिले में वोकेशनल कोर्स कराती है। संस्था को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्राथमिक शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से लाखों रुपये प्रतिवर्ष अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2015 में तत्कालीन निदेशक रामाकृष्ण सूराजी की ओर से किए गए निरीक्षण में संस्था में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गई थीं।
इसमें बैंक से नकद ट्रांजेक्शन भी शामिल था। मंत्रालय के अवर सचिव सजीत कुमार ने संस्था के चेयरमैन से अप्रैल, 2009 से मार्च, 2014 तक हुई अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा। वर्ष 2016 में अध्यक्ष राजेंद्र वर्मा ने जवाब तो दिया लेकिन जवाब से असंतुष्ट मंत्रालय ने जांच समिति गठित कर दी। 30-31 अगस्त, 2016 को समिति में शामिल उप सचिव मानिक मंडल और केसी मीना ने अभिलेखों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के बाद मिली रिपोर्ट के आधार पर अवर सचिव सजीत कुमार ने संस्था अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मंत्रालय करते हुए अनुदान को रोक दिया।
इसके चलते अब संस्था की ओर से न तो भवन का किराया और न ही बिजली का बिल जमा हो पा रहा है। जिस पर भवन स्वामी ने भी संस्था के कार्यालय पर ताला लगा दिया है। स्टाफ को भी विगत कई माह से वेतन नहीं मिला है। संस्था में काम कर रहे रामायण सिंह ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की है।
वर्ष 2010-11 में 43,49,610, वर्ष 2011-12 में 29,83,545, वर्ष 2012-13 में 34,38,050, वर्ष 2013-14 में 25,61,500 और वर्ष 2014-15 में 3,94,628 रुपये संस्था ने बैंक से नकद निकाले। जबकि मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशाें में संस्था की ओर से बडे़ लेनदेन नकद में नहीं किए जा सकते हैं।