गोवर्धन (मथुरा)। मुड़िया पूर्णिमा मेले में प्रसाद के साथ रेजगारी का भी हर वर्ष करोड़ों का कारोबार होता है। मंदिरों में चढ़ावे के लिए श्रद्धालुओं में रेजगारी की काफी मांग रहती है। इससे कई राज्यों के भिखारियों का करोड़ों का कारोबार होता है। मुड़िया मेले में छह राज्यों सहित यूपी के कई शहरों से भिखारियों ने मुड़िया मेला पर गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में डेरा डाल दिया है।
एक रुपये के सिक्के से लेकर पांच रुपये तक के सिक्कों की मेले में बाकायदा छोटी दुकानें हैं। दूर-दूर से आए भिखारी चादर पर रेजगारी रखकर परिक्रमाथियों को बेच रहे हैं। दर होती है 100 रुपये के 70-80 रुपये या और कम।
वह सिक्के वापस लौट कर उन्हीं के पास आ जाते हैं। इससे ज्यादातर को डबल से अधिक मुनाफा होता है। मानसी गंगा मुकुट मुखारबिंद मंदिर के सेवायत संजय शर्मा व मनोज लंबरदार ने बताया कि मंदिर से भिखारी १०० रुपये की रेजगारी को ८० व ९० रुपये में लेकर जाते हैं और परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालु से १०० रुपये वसूल कर उसे ७० या ८० रुपये के सिक्के दे देते हैं। इससे यह अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।
बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम तक के भिखारी पहुंचे गोवर्धन
मुड़िया मेले में रेजगारी के इस कारोबार के लिए पश्चिम बंगाल से लेकर सिक्किम तक के भिक्षुकों ने गोवर्धन में डेरा डाल दिया है। उड़ीसा, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश से और यूपी के इलाहाबाद, बनारस, हरिद्वार, अयोध्या, मथुरा के अन्य कस्बों से भिक्षुक आ गए हैं।
मार्केट की भी नजर
मुड़िया मेले में मंदिरों में चढ़ने वाली करोड़ों की रेजगारी पर मार्केट की भी नजर है। स्टाकिस्ट मंदिरों से सिक्के खरीद कर रेजगारी की किल्लत से जूझ रहे मेट्रो सिटीज के डिपार्टमेंटल स्टोर और मॉल संचालकों को मुंह मांगे दामों पर बेच कर करोड़ों का मुनाफा कमाएंगे।
स्थानीय बाजार में रेजगारी की किल्लत शुरू
मुड़िया मेले के लिए बाजार और बैंकों से पर्याप्त मात्रा में रेजगारी उठा ली गई है। इससे बाजार में रेजगारी की किल्लत शुरू हो गई है। दो से पांच रुपये लौटाने के बजाय दुकानदार ग्राहकों को जबरन टॉफी सहित अन्य आइटम दे रहा है।