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Mathura News: मां राधा ही सृष्टि की मूल शक्ति, उनके बिना कल्याण असंभव

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चौमुहां। हाईवे स्थित श्री राधा-कृष्ण स्वर्ण मंदिर धाम में आयोजित प्रभु कृपा दुख निवारण समागम के प्रथम दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी ने अध्यात्म और भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां राधा ही परमात्मा का साक्षात स्वरूप हैं और वे ही मां दुर्गा का प्रतिरूप हैं। महाब्रह्मर्षि ने कहा कि मां राधा ही वह आदि शक्ति हैं, जिन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेश का सृजन किया है।
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पृथ्वी, आकाश, सूर्य, तारे और समस्त ब्रह्मांड उन्हीं की शक्ति से संचालित हैं। उन्होंने कहा कि मां राधा ही त्रिदेवों के माध्यम से सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। जो लोग भगवान राम, कृष्ण या शिव की उपासना करते हैं, लेकिन मां भगवती के पाठ की अवहेलना करते हैं, वे अज्ञानी हैं और उन्हें पूर्ण कल्याण प्राप्त नहीं हो सकता।
जगद्गुरु ने भगवान शिव के वचनों को उद्धृत करते हुए बताया कि संसार के सभी जप-तप का पुण्य समय से समाप्त हो सकता है, लेकिन मां के पाठ का फल अक्षय रहता है। उन्होंने पाठ की विधि पर जोर देते हुए कहा कि महादेव ने इस पाठ को कीलक द्वारा सुरक्षित किया है। इसलिए जो साधक उत्कीलन, निष्कीलन और शापोद्धार करके दिव्य बीज मंत्रों का पाठ करता है, मां भगवती उस पर अत्यंत प्रसन्न होती हैं। बिना इस शास्त्रीय विधि के पाठ की पूर्णता प्राप्त नहीं होती।
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समागम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मां दुर्गा का पाठ मनुष्य के तन, मन और धन के कष्टों का निवारण करता है। भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियां या किसी भी प्रकार का विष उसे क्षति नहीं पहुंचा सकता। कृष्ण पक्ष की अष्टमी और चतुर्दशी को सर्वस्व मां के चरणों में अर्पित कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने वाला व्यक्ति मां का पार्षद बन जाता है। श्रीकृष्ण लीलाओं की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने प्रेरक प्रसंग सुनाया। बताया कि श्रीकृष्ण सदैव पूर्ण ब्रह्मचारी थे। एक बार उफनती यमुना को पार करने के लिए गोपियों ने जब कृष्ण के ब्रह्मचर्य की शपथ ली, तो स्वयं मां यमुना ने उन्हें रास्ता दे दिया। उन्होंने समझाया कि भगवान कभी भोग नहीं करते, बल्कि भक्त जो अर्पित करता है उसे प्रसाद बना देते हैं।
भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम के महामंत्री सुशील वर्मा गुरुदास ने बताया कि सद्गुरुदेव जी के महान कार्यों के लिए उन्हें पंजाब के राज्यपाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा सनातन रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया है। अब तक उन्हें 70 अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। इसमें लंदन में मिला प्रतिष्ठित इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ दी ज्यूरिस्ट अवार्ड भी शामिल है। उन्होंने बताया कि वृंदावन में 108 एकड़ भूमि पर श्री राधा-कृष्ण स्वर्ण मंदिर धाम का निर्माण हो रहा है। यहां विशाल सत्संग हॉल, आयुर्वेदिक औषधालय और वृद्धाश्रम बनाए जा रहे हैं। समागम में प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं के लिए निरंतर लंगर की व्यवस्था की गई थी।
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