गोकरण नाथ महादेव पर जल चढ़ाती युवती।
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मथुरा/वृंदावन। सावन के चौथे सोमवार को कान्हा की जन्म और लीला भूमि शिवमयी नजर आई। भक्तों ने भोलेनाथ की मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान कृष्ण मुरारी की नगरी में त्रिपुरारी की जय जयकार होती नजर आई।
शहर के रंगेवर महादेव मंदिर, भूतेश्वर महादेव, पिप्लेश्वर महोदव के साथ ही चिंताहरण महादेव तथा वृंदावन के गोपेश्वर महादेव, वनखंडी महादेव मंदिर में भक्तों द्वारा जलाभिषेक किया गया। कई जगह मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। शिव मंदिरों में भक्तों द्वारा रुद्राभिषेक भी किया गया। कई जगह भक्तों ने बाबा भोलेनाथ का गन्ने के रस से भी अभिषेक किया। इधर, मथुरा शहर के गर्तेश्वर मंदिर पर भी भक्तों ने बाबा भोलेनाथ का पूजन किया। गर्तेश्वर महादेव मंदिर की खासी मान्यता है। जहां पर भोर से ही शिवभक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर बेलपत्र आदि अर्पित किए। महिलाओं ने भगवान भोलेनाथ के साथ मां गौरा का विधिवत पूजन किया। शाम को रंगेश्वर मंदिर में सेवायतों द्वारा बाबा भोलेनाथ का भव्य शृंगार किया गया।
उत्तर में विराजमान हैं गोकर्णेश्वर महादेव
कान्हा की नगरी मथुरा के चारों कोनों पर चार शिव मंदिर हैं। पूर्व में पिघलेश्वर, पश्चिम में भूतेश्वर, दक्षिण में रंगेश्वर महादेव और उत्तर में गोकर्णेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर को कृष्ण कालीन बताया जाता है। इस मंदिर में विराजमान भगवान शिव की मूर्ति साक्षात महाकाल का रूप बताई जाती है। ये मंदिर एक टीले पर बना है। जिसे गोकर्णेश्वर अथवा कैलाश कहते हैं। गोकर्ण महादेव का जिक्रभगवत गीता में भी मिलता है। चारों दिशाओं में स्थित होने के कारण भगवान शिव को मथुरा का कोतवाल कहते हैं। गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में जो व्यक्ति लगातार 40 दिन भगवान को शिव स्त्रोत का पाठ और गन्ने के रस से अभिषेक करता है। उसके सभी कष्ट दूर होते हैं, बीमारियां उसके पास नहीं आती। धनलक्ष्मी हमेशा उसके यहां वास करती है।