संघ प्रमुख की वृंदावन में पहली बार संतों और धर्माचार्यों से चर्चा मानी जा रही अहम
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आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत का अचानक वृंदावन आना और पहली बार वृंदावन के संतों से आश्रमों में मुलाकात की जगह-जगह चर्चा है।
2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए संघ का संतों से मिलना अहम माना जा रहा है। संतों और धर्माचार्यों से प्रवचनों और कथाओं में राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार कर हिंदुत्व की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने का आग्रह कर बिखरते भगवा खेमे को एकजुट करने की संघ की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
22 अप्रैल से उज्जैन में शुरू होने वाले सिंहस्थ कुंभ में देश भर के संतों का समागम होगा। माना जा रहा है इससे पहले संघ ब्रज के संतों के माध्यम से अपनी बात को पूरे संत समाज के सामने पहुंचाने के प्रयास में जुट गया है। बीते कुछ समय से देश में उत्पन्न हो रहे राष्ट्रविरोधी मुद्दों के बाद संघ प्रमुख की संताें से मुलाकात नई रणनीति हो सकती है।
साथ ही कुंभ के दौरान होने वाली धर्मसभा में संतों के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा और हिंदुत्व को लेकर कोई आपसी मतभेद या भ्रम की स्थिति न हो इसे लेकर भी संघ प्रमुख का वृंदावन दौरा अहम माना जा रहा है।