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Mathura News: कान्हा की नगरी में दूध का टोटा

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नंदगांव। जिस ब्रजभूमि की पहचान कभी दूध-दही की नदियां बहने वाली धरती के रूप में होती थी, आज उसी कान्हा की नगरी में दूध के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। कभी यहां मेहमानों का स्वागत ताजे दूध और माखन से होता था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि शुद्ध दूध 70 से 80 रुपये किलो तक बिक रहा है।बाबजूद इसके मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही। यह बदलाव केवल महंगाई की कहानी नहीं, बल्कि बदलती ग्रामीण जीवनशैली और घटते पशुपालन की भी तस्वीर है।
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स्थानीय मदन लाल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पशुपालकों की संख्या लगातार कम हुई है। नई पीढ़ी डेयरी और खेती से दूरी बनाकर दूसरे रोजगारों की ओर बढ़ रही है। दूध का उत्पादन घट गया, जबकि मांग लगातार बढ़ रही है।

कभी नंदगांव के बारे में कहा जाता था नंदगांव में आना, दूध-मलाई का खाना। आज वही कहावत लोगों को बीते दिनों की याद दिला रही है। पहले हर घर में गाय-भैंस होती थी और दूध-दही की कोई कमी नहीं रहती थी, लेकिन अब कई परिवार रोजमर्रा की जरूरत के लिए भी दुकानों या आसपास के गांवों से दूध मंगाने को मजबूर हैं। बढ़ती कीमतों के कारण पैक्ड दूध और दही की खपत भी तेजी से बढ़ रही है।
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स्थानीय निवासी संतोष बताते हैं कि मांग पूरी करने के लिए आसपास के गांवों से दूध मंगाया जा रहा है, फिर भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही। संवाद
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