बाल दिवस पर खास...
मथुरा। खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है... कुछ यही कहानी है जिले के खिलाड़ियों की। सरकारी सहायता के बिना ही खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर कामयाबी की पटकथा लिख रहे हैं। बालक और बालिका दोनों ही विभिन्न खेलों में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत का लोहा मनवा चुके हैं। अब उन्हें इंतजार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता का है, ताकि वह उस मंच पर भी अपना दमखम दिखा सकें।
गांव फेंचरी की रहने वाली नीलम और उनकी छोटी बहन चंचल की कुछ इसी प्रकार की कहानी है। गांव के लोग नहीं चाहते थे कि दोनों बहनें कुश्ती खेलें, लेकिन उनके पिता को गांव वालों की राय मंजूर नहीं थी। उन्होंने बेटियों के भविष्य को लेकर गांव छोड़ दिया और दिल्ली में रहकर दोनों बेटियों की ट्रेनिंग कराई। दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर पहलवानों को पटखनी दे चुकी हैं। दोनों बहनें गोल्ड पदक विजेता हैं। पिता कुंवरपाल सिंह ने बताया कि नीलम और चंचल के खून में कुश्ती है। चंचल और नीलम के दादाजी तोताराम हवलदार सेना की ओर से कुश्ती खेलते थे। नीलम जब छोटी थी तो अपने ननिहाल जाती थी। यहां अपने मामा राजू पहलवान और फूफा जनार्दन सिंह को कुश्ती करते हुए देखती। इसके बाद वह भी कुश्ती खेलने लगी।
नीलम ने 50 किलो भार में सीनियर एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर 5वां स्थान प्राप्त किया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नकद धनराशि देकर सम्मानित किया। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने सिपाही के पद पर तैनाती दी। इसके अलावा नीलम 2022 की एशिया चैंपियनशिप में अंडर-23 में सिल्वर, 2023 में गोल्ड, सीनियर वर्ड रैंकिंग में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। चंचल ने नेशनल गेम्स में सिल्वर, 2024 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य, 2025 के नेशनल गेम में सिल्वर और 2025 में दो सिल्वर जीते। पदक जीतने पर प्रदेश सरकार ने चंचल को रेलवे में बाबू के पद पर नौकरी दी।
खुशी वशिष्ठ
- राष्ट्रीय पैनकेक सिलट चैंपियनशिप की प्री जूनियर में रजत पदक जीतने वाली खुशी वशिष्ठ ने बताया कि वह चमेली देवी खंडेलवाल गर्ल्स इंटर कॉलेज में कक्षा 10 में पढ़ती हैं। इस साल बोर्ड की परीक्षा होने के कारण उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर है, लेकिन आगे यदि मौका मिला तो वह खेल में अपना कैरियर जरूर बनाएंगी। बताया कि वह 2024 में श्रीनगर में हुई राष्ट्रीय पैनकेक सिलट प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुकी है।
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आदर्श प्रताप सिंह
- रोलर स्केटिंग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण जीतने वाले आदर्श प्रताप सिंह ने बताया कि वह लगातार अभ्यास कर रहे हैं। स्केटिंग प्रतियोगिता में भारत के लिए गोल्ड जीतने के लिए सुबह चार बजे से ही अभ्यास शुरू कर देते हैं। पढ़ाई के साथ वह खेल पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। उनके कोच श्याम बेरा ने बताया कि आदर्श प्रताप छोटी उम्र से ही स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। वह किसी भी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से पीछे नहीं रहते हैं।
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राधा
गांव नवीपुर की रहने वाली राधा प्रदेशीय कुराश प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। श्री राधा कृष्ण इंटर कॉलेज उस्फार में पढ़ने वाली राधा के पिता मेघश्याम उन्हें खेलने में पूरी मदद करते हैं। अपनी दमदार प्रतिभा के चलते उनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता से पहले भी वह कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी हैं।
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हेमन्या कौन्तेय
श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ने वाली हेमन्या कौन्तेय राष्ट्रीय चक्का फेंक प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुकी हैं। उनके पिता प्रधानाचार्य पदम सिंह कौन्तेय ने बताया कि हेमन्या कौन्तेय विशाखापट्टनम में 2025-26 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अंडर-14 महिला वर्ग के लिए चयनित हुई हैं। राष्ट्रीय चक्का फेंक प्रतियोगिता में हेमन्या जिला, राज्य स्तर पर स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक जीत चुकी है। वर्तमान में वह राष्ट्रीय चक्का फेंक प्रतियोगिता के लिए अभ्यास कर रही हैं।