मथुरा। यूपी बोर्ड ने इस बार हाईस्कूल और इंटर की प्रयोगात्मक परीक्षा के साथ ही उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित कर दिया है। यह दोनों कार्य एक साथ पिछले सप्ताह से जारी हैं। ये दोनों दायित्व शिक्षकों के कंधों पर होने से उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य जनपद में पिछड़ रहा है। अब तक सिर्फ ३५ से ५० प्रतिशत ही मूल्यांकन हो सका है।
यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटर की करीब चार लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन जनपद में तीन मई तक करने को कहा है। तीन केंद्रों पर हो रहे मूल्यांकन का ५० प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। इसमें प्रयोगात्मक विषयों की उत्तरपुस्तिकाएं अब तक सिर्फ ३० से ३५ प्रतिशत, जबकि सामान्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करीब ५० प्रतिशत ही हो सका है। इस धीमी गति का कारण मूल्यांकन के दौरान हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाओं का होना है।
मूल्यांकन के लिए परीक्षक बने शिक्षकों को ही प्रयोगात्मक परीक्षा कराने का भी दायित्व मिला हुआ है। इससे एक साथ दोहरे दायित्व के चलते मूल्यांकन पिछड़ रहा है। प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. मनवीर सिंह ने कहा कि प्रयोगात्मक परीक्षा और उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक साथ शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इससे मूल्यांकन प्रभावित भी हो रहा है।
जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता कर रहे शिक्षक
हाईस्कूल, इंटर की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान परीक्षक बने शिक्षक इन दिनों जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता कर रहे हैं। दरअसल, आए दिन यूपी बोर्ड की दो चार उत्तरपुस्तिकाओं में १००, २०० के नोट निकल आते हैं। इनका संग्रह करने के बाद संबंधित कक्ष में सभी परीक्षकों के नाश्ते की व्यवस्था होती है। यह दौर तीनों ही मूल्यांकन केंद्रों पर चल रहा है। हालांकि कुछ शिक्षक चुपके से इन नोटों को अपनी जेब में रख लेते हैं।