मथुरा। 330 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की एसडीएम स्तर की दूसरी जांच में गड़बड़ी की आशंका है। अपनी समय सीमा में जांच नहीं कर पाए अधिकतर अधिकारियों ने अपनी-अपनी जांच रिपोर्ट कलक्ट्रेट के एक बाबू के हवाले छोड़ दी है। तकनीकी रूप से की जाने वाली इस जांच में उक्त बाबू ही समाज कल्याण विभाग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट तैयार कर रहा है। मनमाफिक रिपोर्ट तैयार कराने के लिए उक्त बाबू के कार्यालय पर पूर्व जांच में डिफॉल्टर पाई गई शिक्षण संस्थाओं के संचालकों का जमावाड़ा लग रहा है।
पूरे प्रदेश भर में छात्रवृत्ति घोटाले से मुख्यमंत्री तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था। छात्रवृत्ति घोटाले की गूंज विधानसभा में भी गूंजी थी। यहां तक कि स्थानीय विधायक पूरन प्रकाश की शिकायत पर इसकी जांच को आर्थिक अपराध शाखा को भी भेजा गया है। इसके बाद गड़बड़ी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए इन डिफॉल्टर माने जाने वाले विद्यालयों की छात्रवृत्ति को भी रोक दिया गया था। पहले इनकी जांच नोडल अधिकारियों ने की, जिसमें विद्यालय संचालकों ने सहयोग तक नहीं किया। फिर शासन के निर्देश पर एसडीएम ने की और अब फिर से एसडीएम स्तर की जांच कराई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार कई तहसीलों के जांचकर्ता अधिकारियों ने टाइप कराने के नाम पर यह रिपोर्ट कलक्ट्रेट के एक बाबू पर छोड़ दी है। रविवार को उक्त बाबू के कार्यालय पर जांच रिपोर्ट लगवाने के लिए शिक्षण संस्थाओं के संचालक जमे रहे। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि यह जांच रिपोर्ट कैसे भेजी जा रही है यह जांचकर्ता अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अभी हमारे पास सभी तहसीलों की रिपोर्ट नहीं आ सकी है।