मथुरा। ठाकुर राधा रमणलाल की छवि।
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वृंदावन (मथुरा)। व्यंजन द्वादशी एवं धर्नु संक्रांति के अवसर पर शीतकालीन सेवा महोत्सव के अंतर्गत श्रीराधारमण लाल का खिचड़ी महोत्सव आयोजित किया गया। महोत्सव के अंतर्गत ठा. राधारमण लाल को अचार, पापड़, मुरब्बा, फल, भाजा, भूना, सूखी मेवा सहित विविध मेवाओं से युक्त खिचड़ी भोग निवेदित किया।
खिचड़ी महोत्सव की अद्भुत छटा को देखकर भक्त एवं श्रद्धालु आनंदित हो रहे थे। शीतलहर से बचाव के लिए कच्चे कोयला में अग्नि प्रज्ज्वलित करके चांदी की अंगीठी द्वारा ठा. राधारमण लाल को तपिश दी, वहीं हिना, केसर एवं गुलाब की मालिश की गई।
श्रीरूप गोस्वामी पाद के अनुसार द्वादश रस निकुंजों के अंतर्गत ठा. राधारमण लाल अपनी प्रियाजू संग अद्भुत भक्ति रस निकुंज में विराजकर भक्तों को दर्शन दिए, शीत ऋतु के रूप में लाल रंग की मखमली जैकेट सहित पीले रंग की पोशाक एवं नूतन आभूषण धारण किए। ठा. राधारमण लाल अपनी प्रियाजू संग विराज रहे थे, ठाकुरजी की शीत ऋतु की नयनाभिराम झांकी सभी भक्तों को मनमोहित कर रही थी।
आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि व्यंजन द्वादशी के दिवस से ही खिचड़ी महोत्सव प्रारंभ होता है। छप्पन भोग छत्तीस व्यंजन किंतु उनमें प्रभु को सर्वप्रिय खिचड़ी ही भोग है। खिचड़ी की महिमा अपरंपार है। खिचड़ी चावल और दाल के मिश्रण से होती है और उसका आध्यात्मिक रूप यह है कि अन्न जो है वह ब्रह्म है ‘अन्नं ब्रम्हैत विजयानि जात’ तो वह अखंड चावल और खंडित दाल। खंडित दाल जो जीवात्मा हैं, अन्न स्वरूप परमात्मा हैं, दोनों का भक्ति द्वारा एकाकार होना ही वह भक्ति की और भक्ति साधना की चरम उपलब्धि है। उसी आध्यात्मिक भाव से इस खिचड़ी महोत्सव का संपादन किया जाता है। वेणुगोपाल गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी, सुवर्ण गोस्वामी आदि उपस्थित थे।