मथुरा। एक तरफ सरकारी नुमाइंदों के जनपद के तालाबों को भरने के दावे और दूसरी तरफ किसानों की पुकार, कोई सुनने को तैयार नहीं। सिंचाई अधिकारी सिर्फ खेती तक सीमित और किसानों को तपती दोपहरी में खेतों से अपने पेट भरने लायक पैदावार भी करनी और पशुओं को भी जिंदा रखने के प्रयास करना है। जनपद के किसान और सिंचाई विभाग के अधिकारियों में कोई तालमेल नहीं है।
दरअसल, इस समय अधिकतर नहरों में पानी नहीं है। जिसके कारण किसान परेशान हैं। किसानों का आरोप है वह पानी नहीं होने के कारण दाल, कपास, चरी तथा अन्य खेती तो कर ही नहीं पा रहे हैं, साथ ही तालाबों में भी पानी नहीं होने के कारण पशुओं को पानी नहीं मिल पा रहा है।
मानागढ़ी निवासी किसान सुभाष नौहवार ने बताया कि तालाबों में पानी ही नहीं है। दो-एक दिन बाद पशुओं के पीने के लिए पानी नहीं बचेगा। उधर, सिंचाई बंधु के उपाध्यक्ष सुधीर रावत ने बताया कि इस समय जायद की फसल है, जिसके लिए सरकार की ओर से पानी देने का कोई प्रावधान ही नहीं है।
सिंचाई विभाग द्वारा सिर्फ रबी और खरीफ की फसल के लिए सिंचाई का पानी दिया जाता है। वहीं सिंचाई विभाग के एक्सईएन बच्चन सिंह ने बताया कि ओखला बैराज के गेट की मरम्मत और बैराज के फ्लोर के मरम्मत का कार्य किए जाने के चलते आगरा नहर को ९ अप्रैल से ७ मई तक नहर बंदी किया जाना प्रस्तावित है।
तालाबों को भरवाने का किया दावा
एक्सईएन बच्चन सिंह ने दावा किया कि हम आगरा नहर के जरिए अभी तक १११ तालाबों के लक्ष्य के सापेक्ष ९५ तालाबोें को २१ मार्च तक भरवा चुके हैं। शेष तालाब जल्द ही भर दिए जाएंगे।